Jaipur Famous Vintage Car : इस कार की सबसे खास बात यह हैं कि इस कार की चाबी असली हीरों और सोने से जड़ी हैं जो इसे खास बनाती हैं. कार के मालिक गौरव नहाटा ने 1956 मॉडल की इस प्लाईमाउथ सेवॉय कार की चाबी और कार में अपना खास लोगों लगवाया हैं जिसके चलते इस कार की पहचान अब जयपुर के रूप में होती हैं.
गौरव नहाटा की यह 1956 मॉडल प्लाईमाउथ सेवॉय कार अपने बेहतरीन लुक और दमदार फीचर्स के लिए दुनियाभर में मशहूर है. कार के मालिक ने इसमें खास लोगो लगवाया है, जिसके चलते अब इसकी पहचान जयपुर से जुड़ गई है. यह कार अमेरिका की फेमस और लग्जरी कारों में शामिल रही है और आज भी इसकी डिमांड काफी ज्यादा है. वर्षों तक लाखों रुपये खर्च कर इस कार को संभाल कर रखा गया है, जिस वजह से यह आज भी नई जैसी नजर आती है.
लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज खास चाबी
लाल रंग की इस शानदार कार को देखकर आमतौर पर लोगों के दिमाग में फेरारी जैसी सुपर लग्जरी कारों की छवि बनती है, लेकिन प्लाईमाउथ सेवॉय भी किसी से कम नहीं है. गौरव नहाटा ने इस कार की चाबी को खास तौर पर असली हीरों और सोने से जड़वाया है. इसी अनोखी वजह से इस कार का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स 2019 में दर्ज किया गया. चाबी की लंबाई 2.4 इंच और चौड़ाई 0.85 इंच है, जो पूरी तरह गोल्ड और असली हीरों से सजी हुई है. कार की खूबसूरती की झलक इसकी चाबी से ही मिल जाती है. यही कारण है कि यह कार देशभर में होने वाली विंटेज कार एग्जीबिशन में खास आकर्षण का केंद्र रहती है और लोग इसे देखने दूर दूर से पहुंचते हैं.
दमदार फीचर्स और शाही इंटीरियर
1956 मॉडल की प्लाईमाउथ सेवॉय कार सिर्फ अपने लुक के लिए ही नहीं, बल्कि अपने दमदार फीचर्स के लिए भी जानी जाती है. इस कार में 6 सिलेंडर का 3.8 लीटर फ्यूल इंजन दिया गया है, जो 120 से 140 हॉर्सपावर की क्षमता के साथ काम करता है. कार की लंबाई करीब 7 फीट है, जो इसे सामान्य कारों से ज्यादा लंबा बनाती है और ड्राइविंग के दौरान अतिरिक्त सावधानी की जरूरत पड़ती है. इसमें तीन गियर और एक रिवर्स गियर दिया गया है, जो हेड ऑपरेटेड तकनीक से संचालित होता है. कार का इंटीरियर भी बेहद शानदार है, जिसमें सोफे जैसी लंबी सीटें लगाई गई हैं, जो सफर को आरामदायक बनाती हैं. कार के फ्रंट लोगो से लेकर डैशबोर्ड तक हर जगह बेहतरीन डिजाइन देखने को मिलता है. यही वजह है कि यह कार सिर्फ लग्जरी नहीं, बल्कि अपनी कीमत और विरासत के कारण भी बेहद खास मानी जाती है.
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नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
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