झुंझुनू जिले की पचेरी कलां पुलिस ने सरकारी नौकरी के नाम पर 19 लाख रुपये की ठगी करने वाले गिरोह के एक और सदस्य शेरसिंह योगी उर्फ सुभाष को गिरफ्तार कर लिया है। रिश्तों की आड़ में रची गई इस साजिश में सगे चाचा ने ही अपने भतीजे को जाल में फंसाया था।
आरोपी शेरसिंह, परिवादी अनिल का सगा चाचा है। इसी पारिवारिक संबंध का फायदा उठाते हुए शेरसिंह ने अपने साथियों राकेश, विकास, सुनील और रूद्रनारायण के साथ मिलकर एक जाल बुना। उन्होंने अनिल को झांसा दिया कि उनकी पहुंच शासन-प्रशासन में ऊपर तक है और वे उसके बेटे व रिश्तेदारों की सरकारी नौकरी लगवा सकते हैं।
फर्जी ‘अपॉइंटमेंट लेटर’ से जीता भरोसा
आरोपियों ने इस ठगी को अंजाम देने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाया। उन्होंने ‘मुख्य अभियंता जल संसाधन विभाग जयपुर के नाम से हूबहू असली दिखने वाले फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार किए। परिवादी ने अपने बेटे विशाल, भांजे निखिल और साले के लड़के गजेन्द्र के भविष्य की खातिर अपनी जमा-पूंजी दांव पर लगा दी। आरोपियों ने इन कागजों के बदले किस्तों में कुल 19 लाख रुपये ऐंठ लिए। जब परिवादी नियुक्ति पत्र लेकर कार्यालय पहुंचा, तो वहां उसे पता चला कि उसके पास मौजूद दस्तावेज महज रद्दी के टुकड़े हैं।
इस मामले की जांच के लिए थानाधिकारी बनवारीलाल के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई थी। मुख्य आरोपी रूद्रनारायण को पुलिस पहले ही दबोच चुकी थी। साक्ष्य जुटाने और बैंक रिकॉर्ड खंगालने के बाद पुलिस ने आरोपी शेरसिंह योगी (60) को झुंझुनू जिला जेल से प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई में कांस्टेबल राजेन्द्र और बलकेश की भूमिका अहम रही
पुलिस की प्राथमिक जांच में सामने आया है कि गिरोह के अन्य सदस्य (राकेश, विकास और सुनील) कथित तौर पर आईटीबीपी (ITBP) में कार्यरत हैं। पुलिस अब शेरसिंह से पूछताछ कर रही है ताकि ठगी गई राशि की बरामदगी की जा सके और फरार आरोपियों के ठिकानों का पता लगाया जा सके।
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