Hyderabad News : मकर संक्रांति पर तेलंगाना में सकिनालु खास महत्व रखता है, जो चावल के आटे, तिल और अजवाइन से बनता है और दो परिवारों के प्रेम व सम्मान का प्रतीक माना जाता है. तेलुगु परंपराओं में सकिनालु का सामाजिक महत्व काफी गहरा माना जाता है. मकर संक्रांति के अवसर पर इसे विशेष रूप से दुल्हन के मायके में तैयार किया जाता है.
सकिनालु बनाने की पारंपरिक विधि
सकिनालु बनाने की प्रक्रिया धैर्य और कौशल की मांग करती है. इसकी मुख्य सामग्री नई फसल के चावल से तैयार किया गया चावल का आटा होता है, जिसे चावल भिगोकर और पीसकर बनाया जाता है. इसमें तिल और अजवाइन मिलाई जाती है, जो स्वाद के साथ साथ पाचन में भी सहायक होती है. नमक और हल्के मसालों से इसका स्वाद संतुलित किया जाता है. इन सभी सामग्रियों को मिलाकर नरम आटा गूंथा जाता है. इसके बाद हाथों की मदद से कपड़े पर छोटे छोटे गोलाकार छल्लों के रूप में आकार दिया जाता है. हल्की धूप या हवा में सुखाने के बाद इन्हें शुद्ध तेल में सुनहरा होने तक तला जाता है.
स्वास्थ्य, संस्कृति और सामुदायिक भावना
सकिनालु की खास बात यह है कि इसमें किसी भी तरह के रंग या प्रिजर्वेटिव का इस्तेमाल नहीं किया जाता. तिल और अजवाइन की मौजूदगी इसे सर्दियों के मौसम के लिए स्वास्थ्यवर्धक बनाती है. आज के आधुनिक दौर में भी तेलंगाना के गांवों और शहरों में महिलाएं समूह में बैठकर सकिनालु बनाती हैं. यह दृश्य सामुदायिक सद्भाव, आपसी सहयोग और पारंपरिक संस्कृति की जीवंत तस्वीर पेश करता है. मकर संक्रांति पर बनने वाला यह व्यंजन स्वाद के साथ साथ परंपरा और सामाजिक जुड़ाव का भी प्रतीक बना हुआ है.
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नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
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