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1980 के मास्को ओलंपिक खेलों में भारतीय हॉकी टीम को गोल्ड जिताने वाले दिग्गज खिलाड़ी दविंदर सिंह गरचा का शनिवार को निधन हो गया। जानकारी के मुताबिक उन्हें सुबह हार्ट अटैक आया। 72 वर्ष की उम्र में गरचा ने आखिरी सांस ली। उनके निधन से खेल और पुलिस विभाग में शोक की लहर है। मॉस्को ओलिंपिक्स में गरचा ने आठ गोल किए थे और भारतीय टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई थी। सात दिसंबर 1952 को जालंधर में जन्मे दविंदर सिंह गरचा अपने वक्त के भारतीय हॉकी टीम के बेहतरीन खिलाड़ियों में गिने जाते थे।
उन्होंने पंजाब पुलिस में भी कई अहम पदों पर काम किया। साल 2012 में वे पंजाब पुलिस से एआईजी (आईपीएस) पद से सेवानिवृत्त हुए। गरचा को करीब से जानने वाले ओलिंपियन सुरिंदर सिंह सोढी ने उनके साथ बिताए पल साझा किए हैं। पढ़िए… स्मृति शेष साल 1975: पंजाब पुलिस में कॉन्स्टेबल के रूप में भर्ती। पंजाब पुलिस लाइन में आयोजित परेड टूर्नामेंट में उनके शानदार प्रदर्शन ने सबका ध्यान खींचा, जहां उन्होंने हर मैच में पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदला।
साल 1976: नेहरू हॉकी टूर्नामेंट में पंजाब पुलिस टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। टीम ने हर मैच एक गोल से जीता। हर मुकाबले में गरचा ने गोल किया। इस उपलब्धि के बाद तत्कालीन कमांडेंट इंद्रजीत सिंह (7वीं बटालियन) ने उन्हें एसआई के पद पर पदोन्नति दी। साल 1980: ओलिंपिक्स में गोल्ड मेडल जीतने के बाद उन्हें आईपीएस पद पर प्रमोट किया गया। ‘गरचा मेरे करीबी मित्र, रूममेट और लंबे समय तक हॉकी के खेल में साथी रहे। एक दिलखुश व्यक्ति।
अभी शुक्रवार को ही करीब डेढ़ घंटे तक उनके साथ था। धूप सेंकते हुए उन्होंने कई पुराने किस्से साझा किए। हॉकी मैच से जुड़ी कई बातें बताईं। उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें छाती में संक्रमण है, लेकिन वे अब बेहतर महसूस कर रहे हैं। बीते दिन सुबह उनके निधन की खबर मिली तो पैरों तले जमीन खिसक गई। मॉस्को ओलिंपिक्स में मैनें 15 गोल किए थे और गरचा ने आठ।
हम दोनों की हिस्सेदारी ने टीम को जीत दिलाई। वो पल आज भी याद है, जब गरचा बेहद खुश थे। पंजाब पुलिस में भी महत्तवपूर्ण पदों पर रहते हुए खेल की सेवा करना नहीं छोड़ा। साल 1979 में ऑस्ट्रेलिया में आयोजित वर्ल्ड पुलिस गोल्फ चैंपियनशिप में उन्होंने गोल्ड जीता। 2009 में बैंकॉक में चैंपियनशिप में दो सिल्वर मेडल अपने नाम किए। दविंदर सिंह गरचा का जीवन खेल, अनुशासन और समर्पण का प्रतीक रहा, जिसे हमेशा सम्मान और गर्व के साथ याद किया जाएगा।
उनके कोच गणेश ने पैनल्टी कार्नर पर उनकी टीम को खूब मेहनत करवाई। तब खिलाड़ी पांच सैकेंड में गेंद को गोल में भेजते थे लेकिन मेहनत के बाद गरचा महज चार सैकेंड में पैनल्टी कार्नर को गोल में बदलना शुरू किया। तब गोल सिर्फ गेंद फट्टे पर लगने पर ही मिलता था। 8 बार ऑल इंडिया पुलिस गोल्ड मेडल : 1980 मॉस्को ओलंपिक में दविंदर सिंह गरचा ने अहम भूमिका निभाई। टूर्नामेंट में 8 गोल किए। पंजाब पुलिस की तरफ से 8 बार ऑल इंडिया पुलिस गोल्ड मेडल, ऑल इंडिया पुलिस टूर्नामेंट में 3 बार सिल्वर मेडल जीते।’
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