फरीदाबाद: फरीदाबाद की हवा इन दिनों बुरी हालत में है. कई इलाकों में आज का AQI 300 से 400 के बीच पहुंच गया. मतलब गंभीर से लेकर खतरनाक जैसी स्थिति है. सेक्टर 17, भविष्य निधि एन्क्लेव, सेक्टर 29, और RPS सिटी में हाल और भी खराब है. यहां लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत होना अब आम बात हो गई है. सेक्टर 17 का AQI आज 406, भविष्य निधि एन्क्लेव का 465, सेक्टर 29 में 386 और RPS सिटी में 372 रहा. सेक्टर 10 HBC और सेक्टर 82 में भी AQI 350 के पार चला गया. कुछ इलाकों जैसे सेक्टर 16A, 41, 30, 8 और 11 की हालत थोड़ी कम खराब रही, वहां AQI 260 से 300 के बीच रहा. सिर्फ सेक्टर 15 थोड़ा बेहतर दिखा, जहां AQI 115 रहा. लेकिन ये भी सेहत के लिहाज से ठीक नहीं है. Local18 चैनल ने जब लोगों से बात की तो कई लोगों ने खुलकर अपनी परेशानियां बताईं.
अब गुरुग्राम की बात करें तो वहां हाल फरीदाबाद जितना बुरा नहीं है, लेकिन अच्छी हवा भी नहीं है. शहर का औसत AQI 170 से 216 के बीच रहा, जो मध्यम से खराब कैटेगरी में आता है. सेक्टर 51 में तो AQI 205 तक पहुंच गया. गुरुग्राम की हवा में PM2.5 और PM10 जैसे छोटे-छोटे कण काफी ज्यादा हैं…मतलब धूल और प्रदूषण के कण सांस के साथ अंदर जा रहे हैं जो बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर लोगों के लिए परेशानी बढ़ा रहे हैं. ये कण फेफड़ों तक पहुंचते हैं और समय के साथ नुकसान करते हैं.
फरीदाबाद की खराब हवा अब गांवों तक भी पहुंच गई है. उतनी नहीं जितनी शहर में लेकिन फर्क साफ दिखने लगा है. सुनपेड़ गांव के पंकज आर्य, जो स्टूडेंट हैं, उन्होंने बताया कि अब आंखों में जलन, सांस लेने में परेशानी, खांसी-जुकाम जैसी दिक्कतें गांव में भी होने लगी है. पहले ऐसा नहीं था, लेकिन अब गांव की हवा भी खराब हो गई है.
वहीं अभय, जो 11वीं में पढ़ता है उसने कहा कि जब बाइक से शहर जाते हैं तो पूरे रास्ते आंखें जलती हैं और खांसी आती है. उसकी नजर में फरीदाबाद की हवा खराब होने की सबसे बड़ी वजह फैक्ट्रियां हैं, जो धुआं छोड़ती हैं. पहले लोग आसानी से सफर कर लेते थे अब बिना मास्क बाहर निकलना मुश्किल हो गया है. गला खराब रहता है.
शिवम्, जो बल्लभगढ़ के सुनपेड़ गांव में रहते हैं बताते हैं कि सुबह-सुबह जो कोहरा दिखता है, उसमें अब धुआं और प्रदूषण मिला होता है. अब गांव में भी AQI 200 के पार रहता है. उनका कहना है कि शहर की फैक्ट्रियों की वजह से वहां हालत और भी बदतर है. खेती भी अब इससे बच नहीं पाई है. सब्जियों पर धूल की परत जम जाती है. पत्ते खराब हो जाते हैं फसलें पूरी नहीं बढ़ पातीं और किसानों को सीधा नुकसान उठाना पड़ता है.
शिवम् खुद सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं. पहले दिल्ली जाकर पढ़ाई करते थे, लेकिन अब गांव में ही रहकर तैयारी कर रहे हैं. फरीदाबाद जाते रहते हैं वहां वाहन और फैक्ट्री का धुआं प्रदूषण को बढ़ा रहा है, बहुत बुरा हाल है.
सीधी बात करें तो फरीदाबाद की हवा फिलहाल बहुत खराब है और लोग इसे अपनी सेहत पर महसूस भी कर रहे हैं. शहर में फैक्ट्रियां, गाड़ियां, धूल-मिट्टी, निर्माण और मौसम…सब मिलकर हवा में कण बढ़ा रहे हैं. गांवों में भी अब ये असर दिख रहा है. सरकार और प्रशासन ने कुछ कदम उठाए हैं लेकिन जमीन पर इनका असर कम ही दिखता है. हालत ये है कि हर उम्र के लोग परेशान हैं.अगर जल्द बारिश नहीं हुई या तेज हवा नहीं चली तो मुश्किल और बढ़ेगी. ऐसे में लोगों को खुद भी सतर्क रहना होगा मास्क पहनना बाहर कम निकलना और बच्चों बुजुर्गों का खास ध्यान रखना जरूरी है. अब ये सिर्फ शहर का मसला नहीं रहा… गांव भी चपेट में आ चुके हैं और ये आने वाले समय के लिए बड़ी चिंता बन गया है.
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