बसंत पंचमी के पावन अवसर पर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में पूरे विधि-विधान से तिलकोत्सव संपन्न हुआ, जहां बाबा का विशेष श्रृंगार कर तिलक अर्पित किया गया.‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयघोष के बीच भक्तों ने अबीर-गुलाल उड़ाते हुए लोग इस दुर्लभ परंपरा के साक्षी बने.
12 ज्योतिर्लिंगों में विशेष स्थान रखने वाला बाबा बैद्यनाथ धाम न सिर्फ आस्था का केंद्र है, बल्कि यहां की परंपराएं भी इसे अन्य ज्योतिर्लिंगों से अलग पहचान देती हैं. बाबा बैद्यनाथ को आरोग्य के देवता के रूप में पूजा जाता है और यहां होने वाले धार्मिक अनुष्ठान सदियों पुरानी परंपराओं को आज भी जीवंत रखते हैं. इन्हीं विशिष्ट परंपराओं में से एक है बसंत पंचमी के दिन होने वाला बाबा का तिलकोत्सव. इसे बड़े ही श्रद्धा और विधि-विधान के साथ संपन्न किया जाता है.

माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बाबा बैद्यनाथ मंदिर में परंपरा अनुसार तिलकोत्सव मनाया गया. बसंत पंचमी के अवसर पर पूजा-अर्चना के उपरांत श्रृंगार पूजा के समय बाबा को तिलक अर्पित किया गया. मान्यता है कि इसी दिन से बाबा के श्रृंगार में विशेष परिवर्तन प्रारंभ हो जाता है. मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों का आना-जाना लगा रहा और पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा.

इस पावन अवसर पर मंदिर में सरदार पंडा की उपस्थिति में तीर्थपुरोहितों ने विशेष पूजा संपन्न कराई. बाबा का गंगाजल से स्नान कराया गया. इसके बाद धूप-दीप दिखाकर विधिवत नैवेद्य अर्पित किया गया. ऋतु फल के रूप में आम की मंजरी विशेष रूप से चढ़ाई गई. पारंपरिक पुआ का भोग भी बाबा को अर्पित किया गया.
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तिलकोत्सव की रस्म के दौरान बाबा को अबीर अर्पित किया गया. श्रृंगारी पूजा में चंदन लेपन के साथ इत्रयुक्त अबीर चढ़ाकर तिलकोत्सव की विधि पूरी की गई. इसके पश्चात बाबा की भव्य महाआरती हुई, जिसके साथ ही पूजा का विधिवत समापन किया गया. आरती के समय मंदिर परिसर ‘बोल बम’ और बाबा बैद्यनाथ के जयकारों से गूंज उठा.

इस संबंध में मंदिर तीर्थपुरोहित जयदेव बाबा ने बताया कि बसंत पंचमी से लेकर होली तक बाबा के श्रृंगार पूजा में नियमित रूप से अबीर चढ़ाने की परंपरा है. यह परंपरा आदिकाल से चली आ रही है और आज भी पूरी निष्ठा के साथ निभाई जा रही है. इसी अवधि में बाबा का श्रृंगार विशेष रूप से मनोहारी होता है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं.

बसंत पंचमी के अवसर पर मिथिलांचल से आए तिलकहरुओं ने बाबा मंदिर में विशेष उत्साह के साथ तिलकोत्सव मनाया. उन्होंने बाबा पर जलार्पण कर पूजा-अर्चना की और भैरव मंदिर में लड्डू अर्पित किए. भक्तों ने गंगाजल, अक्षत, जौ और अबीर चढ़ाकर बाबा को नमन किया. इसके बाद मंदिर प्रांगण में एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर होली खेली और बाबा के भजनों पर झूमते नजर आए.

इस दिन बाबा मंदिर का पट सुबह चार बजकर पांच मिनट पर खोला गया. सरकारी पूजा के बाद भक्तों के लिए मंदिर के द्वार खोल दिए गए. बसंत पंचमी होने के कारण मंदिर में अप्रत्याशित भीड़ देखने को मिली. स्थानीय भक्तों के साथ-साथ दरभंगा, सहरसा, मधुबनी, पूर्णिया, झंझारपुर सहित मिथिलांचल के कई जिलों से आए श्रद्धालुओं की संख्या सबसे अधिक रही. भक्तों को मानसरोवर तट फुट ओवरब्रिज के माध्यम से गर्भगृह में प्रवेश कराया गया.

आज अबीर से तिलकोत्सव करने के बाद अब हरी हर मिलन तक हर रोज श्रृंगार के समय बाबा बैद्यनाथ के ऊपर अबीर अर्पण किया जाएगा. तीर्थपुरोहित बताते हैं कि एक तरह से आज से ही देवघर में होली की शुरुआत हो गयी.
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