Dausa News : दौसा के ढोलावास गांव में भाजपा विधायक रामबिलास मीणा का JEN पर विवादित बयान वायरल हुआ, नरेगा मजदूरों की मजदूरी कटौती पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है. बताया जा रहा है कि यह वीडियो करीब तीन दिन पुराना है और दौसा जिले के ढोलावास गांव का है. वीडियो उस समय का बताया जा रहा है जब विधायक रामबिलास मीणा नरेगा मजदूरों से बातचीत कर रहे थे और मजदूरों ने अपनी मजदूरी को लेकर गंभीर शिकायतें उनके सामने रखीं.
बताया जा रहा है कि यह वीडियो करीब तीन दिन पुराना है और दौसा जिले के ढोलावास गांव का है. वीडियो उस समय का बताया जा रहा है जब विधायक रामबिलास मीणा नरेगा मजदूरों से बातचीत कर रहे थे और मजदूरों ने अपनी मजदूरी को लेकर गंभीर शिकायतें उनके सामने रखीं. इसी दौरान JEN को लेकर यह विवादित बयान सामने आया.
नरेगा मजदूरों की शिकायत और विधायक का तीखा जवाब
वायरल वीडियो में नरेगा मजदूर विधायक से शिकायत करते नजर आ रहे हैं कि सरकार द्वारा तय 280 रुपये की मजदूरी दर के बावजूद उन्हें केवल डेढ़ सौ रुपये ही मिलते हैं, वह भी समय पर नहीं मिलते. मजदूरों का आरोप है कि भुगतान में कटौती की जा रही है और इसमें JEN की भूमिका है. मजदूरों ने सीधे तौर पर विधायक से कहा कि JEN पैसा काट लेता है. इसी बात पर विधायक रामबिलास मीणा उखड़े हुए नजर आते हैं.
वीडियो में विधायक मजदूरों से कहते सुनाई दे रहे हैं कि JEN से साफ कह देना, अगर उसने एक रुपया भी काटा तो मैं उसको काट दूंगा. विधायक का यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक विवाद का रूप लेता जा रहा है. कई लोग इसे गुस्से में दिया गया बयान बता रहे हैं तो वहीं कुछ इसे खुले तौर पर धमकी के तौर पर देख रहे हैं.
वायरल वीडियो, बयान और बढ़ता राजनीतिक विवाद
इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि यह वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर फैल रहा है और इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. विपक्ष इस बयान को लेकर भाजपा विधायक पर निशाना साध सकता है, वहीं समर्थक इसे मजदूरों के पक्ष में खड़े होने का भावनात्मक बयान बता सकते हैं. फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि विधायक का यह बयान किस संदर्भ में और किस भावना के तहत दिया गया, लेकिन शब्दों की गंभीरता ने मामले को संवेदनशील बना दिया है.
यह भी उल्लेखनीय है कि NEWS 18 राजस्थान वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता और न ही यह स्पष्ट है कि वीडियो को किस प्लेटफॉर्म पर सबसे पहले साझा किया गया. बावजूद इसके, नरेगा मजदूरों की मजदूरी, भुगतान में कथित कटौती और अधिकारियों की भूमिका जैसे मुद्दे एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं.
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नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
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