पंजाबी यूनिवर्सिटी के फार्मास्युटिकल साइंसेज और ड्रग रिसर्च विभाग में हाल ही में हुई शोध के माध्यम से धनिये के पत्तों से एनीमिया (खून की कमी) के लिए असरदार दवा विकसित की गई है। इस शोध का नेतृत्व डॉ. कुलदीप सिंह ने किया और उनका मार्गदर्शन डॉ. डिंपल सेठी (एसोसिएट प्रोफेसर) ने किया।
डॉ. डिंपल सेठी ने बताया कि धनिये में प्राकृतिक रूप से आयरन, फोलिक एसिड और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं जो रेड ब्लड सेल्स के निर्माण को तेज करते हैं। इस दवा के प्रयोग से हीमोग्लोबिन स्तर सिर्फ 10 दिनों में बढ़ गया, जबकि पारंपरिक दवाओं में यही परिणाम प्राप्त करने में लगभग 28 दिन लगते हैं।
डॉ. कुलदीप सिंह ने कहा कि यह दवा सुरक्षित, सस्ती और साइड-इफेक्ट से मुक्त है। शोध ने हर्बल और आधुनिक फार्मास्युटिकल विज्ञान के संयोजन के माध्यम से बेहतर और प्रभावशाली परिणाम देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
शोध की सामाजिक और वैज्ञानिक अहमियत
यह दवा बच्चों, महिलाओं और गर्भवती महिलाओं में एनीमिया के इलाज के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। डॉ. कुलदीप सिंह का कहना है कि यह शोध भविष्य में विश्व स्तर पर एनीमिया के प्राकृतिक और असरदार इलाज के लिए संभावनाएं बढ़ा सकता है। वाइस-चांसलर डॉ. जगदीप सिंह ने शोधकर्ताओं और सुपरवाइजर को बधाई दी और कहा कि इस तरह की शोध विश्वविद्यालय की अकादमिक और सामाजिक प्रतिबद्धता को मजबूत करती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कुदरती स्रोतों पर आधारित दवाओं का विकास आज की जरूरत है, और पंजाबी यूनिवर्सिटी इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभा रही है।
दवा की विशेषता
- धनिये के पत्तों में प्राकृतिक आयरन और फोलिक एसिड की उच्च मात्रा।
- दवा 10 दिनों में हीमोग्लोबिन स्तर बढ़ाने में सफल।
- पारंपरिक दवाओं की तुलना में 3 गुना तेज़ परिणाम।
- सुरक्षित, सस्ती और लगभग किसी भी साइड-इफेक्ट से मुक्त।
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