रायपुर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय आगजनी को लेकर कांग्रेस ने न्यायिक जांच कराने की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार विभागीय जांच के जरिए मामले को दबाने की कोशिश कर रही है, जबकि अग्निकांड की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच जरूरी है। कांग्रेस ने दावा किया है कि इस घटना में शिक्षा विभाग से जुड़ी कई महत्वपूर्ण फाइलें जल गई है। इनमें मिड-डे मील योजना, निजी स्कूलों को दिए जाने वाले अनुदान, मदरसों के अनुदान, विभागीय पदोन्नति और विभिन्न निर्माण कार्यों से संबंधित दस्तावेज शामिल बताए जा रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि इतनी अहम फाइलों का एक साथ जलना गंभीर सवाल खड़े करता है। आरोप लगाया कि आगजनी कथित भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए कराई गई हो सकती है। पार्टी का कहना है कि भाजपा सरकार बनने के बाद शिक्षा विभाग भ्रष्टाचार का केंद्र बन गया है और डीईओ कार्यालय की आगजनी उसी की कड़ी हो सकती है। न्यायाधीश की निगरानी में जांच की मांग कांग्रेस ने इस मामले की जांच हाईकोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में कराने की मांग की है। पार्टी ने पिछली घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि इससे पहले भी सबूत मिटाने के आरोपों के बीच सीएसईबी कार्यालय में आगजनी की घटना हुई थी, लेकिन उस मामले की जांच रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं की गई। पार्टी ने यह भी कहा कि साल 2018 में भाजपा सरकार के कार्यकाल के अंतिम दिनों में अवंती विहार और बीटीआई मैदान में बड़ी संख्या में सरकारी फाइलें जलाए जाने के आरोप लगे थे। उस दौरान तत्कालीन मंत्रियों के आवासों में भी फाइलें जलने की घटनाएं सामने आई थीं। कांग्रेस का आरोप है कि आगजनी के जरिए भ्रष्टाचार छिपाने का यह भाजपा का पुराना तरीका रहा है। यदि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो उसे न्यायिक जांच से पीछे नहीं हटना चाहिए। प्रशासन की जांच जारी फिलहाल, डीईओ कार्यालय आगजनी मामले में प्रशासन की ओर से जांच प्रक्रिया जारी है। कांग्रेस के आरोपों के बाद इस मामले पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
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