विश्वविख्यात सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। इस मामले में नया मोड़ तब आया है, जब महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजवर्धन सिंह परमार ने अजमेर जिला न्यायालय में याचिका दायर करने की घोषणा की है।
दरगाह परिसर में विद्यमान है शिवलिंग
डॉ. परमार का दावा है कि अजमेर दरगाह परिसर में शिवलिंग विद्यमान है और यदि वहां वैज्ञानिक जांच अथवा खुदाई कराई जाती है, तो इसके प्रमाण सामने आ सकते हैं।
साक्ष्य के आधार पर कर रहे दावा
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एपी सिंह के साथ अजमेर के सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान डॉ. परमार ने मीडिया से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि उनके पास ऐसे साक्ष्य मौजूद हैं, जिनके आधार पर वे यह दावा कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास में कई स्थानों पर आक्रांताओं द्वारा मंदिरों पर कब्जा कर मजारों और मस्जिदों का निर्माण किया गया है और उनका मानना है कि अजमेर दरगाह का मामला भी उसी कड़ी से जुड़ा हुआ है।
अजमेर दरगाह की निष्पक्ष व वैज्ञानिक जांच की मांग
डॉ. परमार ने बताया कि वे इस विषय को लेकर लंबे समय से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखते आ रहे हैं। पत्रों के माध्यम से उन्होंने अजमेर दरगाह की निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की है, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। उन्होंने कहा कि अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्होंने न्यायपालिका का सहारा लेने का निर्णय किया है।
अढ़ाई दिन के झोपड़े की जांच की भी मांग
उन्होंने अजमेर स्थित ऐतिहासिक स्थल अढ़ाई दिन के झोपड़े का भी उल्लेख किया और कहा कि इस स्थल को लेकर भी वे कई बार पत्राचार कर चुके हैं। उनका कहना है कि इन सभी मामलों में ऐतिहासिक तथ्यों और पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर जांच आवश्यक है।
कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा मामला: एपी सिंह
प्रेस वार्ता में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता एपी सिंह ने कहा कि याचिका विधि सम्मत तरीके से अजमेर जिला न्यायालय में दायर की जाएगी। न्यायालय से तथ्यों के आधार पर उचित आदेश पारित करने का आग्रह किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरा मामला कानून के दायरे में रहकर आगे बढ़ाया जाएगा।
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न्यायपालिका पर पूरा भरोसा
डॉ. राजवर्धन सिंह परमार ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है और उन्हें उम्मीद है कि अदालत इस मामले में निष्पक्ष निर्णय देगी। उन्होंने अपील की कि इस विषय को शांति और कानून व्यवस्था के दायरे में रहकर देखा जाए। अब याचिका दायर होने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि न्यायालय इस मामले में क्या रुख अपनाता है और आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में जाती है।
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