अधिवक्ता पुष्पराज साहू के अनुसार, सर्पदंश से हुई मृत्यु को राज्य आपदा राहत निधि (SDRF) के अंतर्गत रखा गया है. यदि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण स्पष्ट रूप से सर्पदंश दर्ज है, तो मृतक के आश्रितों को मुआवजा देने का प्रावधान है.
तत्काल सूचना देना जरूरी
सर्पदंश की घटना होने पर सबसे पहले इसकी सूचना स्थानीय लेखपाल (राजस्व निरीक्षक), तहसीलदार या नजदीकी थाने को देना आवश्यक है. यह सूचना आगे चलकर जांच रिपोर्ट और मुआवजा फाइल का अहम हिस्सा बनती है.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट सबसे अहम दस्तावेज
अधिवक्ता साहू बताते हैं कि मुआवजा पाने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट सबसे जरूरी दस्तावेज है. इसमें मृत्यु का कारण स्पष्ट रूप से सर्पदंश लिखा होना चाहिए. बिना पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुआवजा मिलना लगभग असंभव हो जाता है.
मुआवजे के लिए आवश्यक दस्तावेज
मुआवजा आवेदन के समय निम्न दस्तावेज संलग्न करना जरूरी होता है- मृत्यु प्रमाण पत्र, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृतक के कानूनी वारिसों के आधार कार्ड, बैंक खाते की पासबुक/कैंसिल चेक, FIR (यदि दर्ज की गई हो) और संबंधित विभाग से प्राप्त क्लेम फॉर्म.
कहां और कैसे करें आवेदन?
सभी दस्तावेजों के साथ आवेदन 15 दिनों के भीतर एसडीएम, तहसीलदार या जिला प्रशासन कार्यालय में जमा करना चाहिए. आवेदन के बाद राजस्व विभाग द्वारा जांच की जाती है और रिपोर्ट स्वीकृत होने पर फाइल आगे बढ़ाई जाती है.
कितना मिलेगा मुआवजा और कैसे होगा भुगतान?
राज्य आपदा राहत निधि के तहत आमतौर पर 4 लाख रुपये तक की सहायता दी जाती है. कुछ मामलों में जिला प्रशासन या वन विभाग की ओर से अतिरिक्त सहायता मिल सकती है, जिससे कुल राशि 5 लाख रुपये तक पहुंच सकती है. स्वीकृति के बाद राशि डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है.
जागरूकता और समय सबसे जरूरी
पुष्पराज साहू ने कहा कि समय पर पोस्टमार्टम, दस्तावेज और आवेदन न होने के कारण कई परिवार मुआवजे से वंचित रह जाते हैं, इसलिए सर्पदंश की घटना के बाद तुरंत अस्पताल ले जाना, सूचना देना और कानूनी प्रक्रिया शुरू करना बेहद जरूरी है. यह जानकारी न सिर्फ पीड़ित परिवारों के लिए राहत लेकर आ सकती है बल्कि सर्पदंश जैसी घटनाओं में उनके कानूनी अधिकारों को समझने में भी मददगार साबित होगी.
बिलासपुर में सर्पदंश से एक श्रमिक की मौत के बाद मुआवजा नहीं मिलने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है, जहां जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू की सिंगल बेंच में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बालोद और बालाघाट जिले के कलेक्टरों को नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने सवाल उठाया कि सर्पदंश से मौत पर 4 लाख रुपये मुआवजे का स्पष्ट प्रावधान होने के बावजूद 9 साल बीत जाने के बाद भी मृतक के परिजनों को सहायता क्यों नहीं दी गई. मामले में बताया गया कि मृतक की पत्नी और परिवार पिछले 9 वर्षों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिला. हाईकोर्ट ने पूरे मामले पर जवाब तलब करते हुए प्रशासन की भूमिका पर गंभीर नाराजगी जताई है.
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