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New Groundnut Variety RG-638 Features for Farmers: भारतीय मूंगफली अनुसंधान संस्थान. बीकानेर ने ‘आरजी-638’ नामक मूंगफली की नई किस्म विकसित की है. जो मात्र 120 दिनों में तैयार हो जाती है. यह किस्म प्रचलित आरजी-510 से 45 दिन कम समय लेती है. जिससे पानी और बिजली की बचत होगी. 50% तेल और प्रति हेक्टेयर 33 क्विंटल उपज के साथ यह 2026 से किसानों के लिए उपलब्ध होगी.
New Groundnut Variety RG-638 Features for Farmers: बीकानेर स्थित भारतीय मूंगफली अनुसंधान संस्थान के क्षेत्रीय केंद्र ने मूंगफली उत्पादक किसानों के लिए एक बड़ी सौगात दी है. संस्थान ने मूंगफली की एक नई और उन्नत किस्म ‘आरजी-638’ विकसित की है. लंबे समय तक चले वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद अब यह किस्म वर्ष 2026 के सीजन में किसानों को बुवाई के लिए उपलब्ध करवाई जाएगी. संस्थान के तकनीकी अधिकारी लोकेश कुमार ने बताया कि इस किस्म की सबसे बड़ी खासियत इसका कम समय में पककर तैयार होना है. जहां पारंपरिक मूंगफली किस्मों को तैयार होने में लगभग 150 दिन का समय लगता है. वहीं आरजी-638 मात्र 120 से 125 दिनों में पूरी तरह तैयार हो जाती है.
वर्तमान में राजस्थान का लगभग आधा हिस्सा मूंगफली की ‘आरजी-510’ किस्म पर निर्भर है. नई किस्म आरजी-638 इसकी तुलना में एक से डेढ़ महीना कम समय लेती है. इसका सीधा मतलब यह है कि किसानों को फसल की सिंचाई के लिए कम पानी और कम बिजली की आवश्यकता होगी. साथ ही श्रम लागत में भी उल्लेखनीय कमी आएगी. खेती का चक्र छोटा होने से किसान अपनी जमीन का उपयोग अन्य फसलों के लिए जल्दी कर सकेंगे. यह किस्म राजस्थान जैसे शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. जहां पानी की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनी रहती है.
बाजार में बढ़ेगी मांग: बोल्ड दाने और अधिक तेल
आरजी-638 किस्म न केवल समय बचाती है. बल्कि गुणवत्ता के मामले में भी यह अन्य किस्मों से काफी आगे है. इसके दाने काफी ‘बोल्ड’ यानी आकार में बड़े और आकर्षक होते हैं. जिससे इसे बाजार में अच्छी कीमत मिलना तय है. इसके अलावा. इस मूंगफली में तेल की मात्रा लगभग 50 प्रतिशत तक पाई जाती है. अधिक तेल प्रतिशत होने के कारण तेल मिलों और खाद्य उद्योगों में इसकी मांग बहुत अधिक रहेगी. तकनीकी अधिकारी ने बताया कि इस किस्म की औसत उपज लगभग 33 क्विंटल प्रति हेक्टेयर आंकी गई है. जो किसानों की आय में भारी वृद्धि करने में सक्षम है.
वैज्ञानिकों की 5 साल की मेहनत का परिणाम
इस किस्म को विकसित करने के लिए वैज्ञानिकों ने पिछले चार से पांच वर्षों तक लगातार शोध और कठिन परिश्रम किया है. अलग-अलग मिट्टी और जलवायु परिस्थितियों में परीक्षण करने के बाद इसे वर्ष 2023 में सफल घोषित किया गया था. अब सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा कर इसे 2026 के कृषि सीजन के लिए तैयार कर लिया गया है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह वैरायटी न केवल राजस्थान. बल्कि देश के अन्य राज्यों के मूंगफली उत्पादन की दिशा और दशा बदल देगी.
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Vicky Rathore is a multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience in digital media, social media management, video production, editing, content writing, and graphic, A MAJMC gra…और पढ़ें
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