बरनाला में समूह अध्यापक यूनियनों ने डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने जबरन थोपे गए अध्यापक योग्यता टेस्ट (TET) को रद्द करने की मांग की। पंजाब सरकार के खिलाफ रोष व्यक्त करते हुए, अध्यापकों ने AAP सांसद गुरमीत सिंह मीत हेयर के आवास के बाहर पंजाब सरकार का पुतला भी फूंका। इस अवसर पर डेमोक्रेटिक टीचर फ्रंट के जिला अध्यक्ष राजीव कुमार ने बलजिंदर प्रभू, हरेंद्र मल्लियां, गुरमीत सुखपुरा, नरिंदर शैहना, सुखविंदर कौर और कुलदीप रानी के साथ अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि पिछले कई महीनों से TET को रद्द करने की मांग चल रही है। प्रदर्शनकारी अध्यापकों ने सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के फैसले का जिक्र किया, जिसमें कहा गया है कि बिना TET के किसी भी शिक्षक को पदोन्नत नहीं किया जाना चाहिए और न ही शिक्षा विभाग में नियुक्त किया जाना चाहिए। अध्यापकों का मानना है कि यह फैसला गलत है और पंजाब सरकार को इसके खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करें सरकार उन्होंने तर्क दिया कि NCTE ने 2011 में TET लागू किया था, जो 2011 से पहले नियुक्त हुए कई अध्यापकों पर लागू नहीं होता था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इन शर्तों को 2011 से पहले और बाद के सभी अध्यापकों पर लागू कर दिया है, जिससे उन्हें परेशानी हो रही है। अध्यापकों ने पंजाब सरकार से मांग की है कि वह सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करे। उनकी दूसरी मांग यह थी कि मौजूदा बजट सत्र समाप्त होने पर एक विशेष अध्यादेश लाया जाए और TET के विरोध में एक प्रस्ताव पारित किया जाए। अध्यापकों ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार ने उनकी इन दोनों मांगों को अब तक नजरअंदाज किया है और कोई पुनर्विचार याचिका दायर नहीं की है।
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