Kishore Khimawat Success Story: बाड़मेर के बिस्सू खुर्द के किशोर खीमावत ने कठिन संघर्ष के बाद दूसरे प्रयास में पुलिस कॉन्स्टेबल बनकर परिवार का सपना साकार किया. पिता कुंभाराम ने जीवनभर बैलगाड़ी हांककर मजदूरी की, ताकि बेटा पढ़कर अफसर बने. सीमित संसाधन और आर्थिक तंगी के बावजूद किशोर ने रोजाना 30 किलोमीटर बस से सफर कर पढ़ाई की और मेघवाल समाज की हॉस्टल में रहकर तैयारी की. मोबाइल और इंटरनेट की सुविधा न होने के बावजूद मेहनत और लगन से दूसरे प्रयास में सफलता मिली.अब किशोर अपने गांव और परिवार का नाम रोशन कर रहा है.
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