Ajab Gajab: पश्चिम राजस्थान के बाड़मेर की महिलाओं ने सविना हस्तकला स्वयं सहायता समूह के माध्यम से 15 किलो वजनी और 130×130 सेंटीमीटर साइज की अनोखी बेडशीट तैयार की, जिसे बनाने में करीब एक माह लगा. इसमें अजरख, कांता और एप्लिक वर्क का संगम है और हर स्टिच हाथ की बारीकी का परिचायक है. इस विशेष बेडशीट का ऑर्डर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिया था, जो अब राष्ट्रपति भवन की शोभा बढ़ा रही है. सीमित संसाधनों के बावजूद बाड़मेर की महिलाएं अपने पारंपरिक हुनर के दम पर राष्ट्रीय पहचान बना रही हैं.
रेगिस्तान की धरती बाड़मेर एक बार फिर अपने पारंपरिक हुनर के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है, यहां के सविना हस्तकला स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने ऐसी अनोखी और भारी-भरकम बेडशीट तैयार की है, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह जाता है. बाड़मेर की सविना हस्तकला स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने 15 किलो वजनी एक विशेष बेडशीट तैयार की है.
एक महीने में तैयार हुई बेडशीट की कीमत 10,500 रुपये
इस बेडशीट का साइज 130×130 सेंटीमीटर है और इसे बनाने में महिलाओं को करीब एक माह का समय लगा है. यह कोई साधारण बेडशीट नहीं बल्कि पूरी तरह सुई-धागे से बुना हुआ हाथों का हुनर है. इस बेडशीट की कीमत करीब 10,500 रुपये है और इसे आम बाजार के लिए नहीं बल्कि विशेष ऑर्डर पर ही तैयार किया जाता है. खास बात यह है कि इस तरह की 15 बेडशीट का ऑर्डर खुद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिया था, जो अब राष्ट्रपति भवन की शोभा बढ़ा रही हैं. मोटे सूती धागों, घने भराव और जटिल डिजाइनों की वजह से इसका वजन सामान्य बेडशीट से कई गुना अधिक है.
एप्लिक, कांता और अजरख का संगम है यह बेडशीट
स्वयं सहायता समूह की अनिता चौधरी के मुताबिक, सबसे पहले डिजाइन तैयार किया जाता है. उसके बाद अजरख प्रिंटेड कपड़े को बेस के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. फिर उस पर कांता वर्क से महीन सिलाई की जाती है, एप्लिक वर्क के जरिए पारंपरिक आकृतियां उभारी जाती हैं और अंत में कांच वर्क से इसे आकर्षक रूप दिया जाता है. हर स्टिच में हाथ की मेहनत और बारीकी जरूरी होती है. रेगिस्तानी इलाके में सीमित संसाधनों के बावजूद महिलाएं अपने हुनर के दम पर न केवल परिवार का सहारा बन रही हैं, बल्कि पारंपरिक हस्तकला को नई पहचान भी दिला रही हैं. बाड़मेर की हजारों महिलाएं ऐसी बारीक कारीगरी की वजह से दुनियाभर में अपनी अलग पहचान रखती हैं.
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