दरअसल, विराट रामायण मंदिर परिसर में स्थित तालाब के किनारे आज यानी महाशिवरात्रि के दिन सहस्र शिवलिंग की स्थापना के साथ प्राणप्रतिष्ठा की जाएगी. इसके लिए प्राचीन पांडुलिपियों से विधि खोजकर निकाली गई है. इसी विधि से प्राचीन काल में शिवलिंग की स्थापना होती थी, जो अब प्रचलन में नहीं है.
उसी पत्थर पर उकेरा गया रूप
33 फीट लंबे विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग का छोटा रूप और नंदी की मूर्ति अरघा सहित महाबलीपुरम से मंगाई गई है. यह शिवलिंग भी उसी पत्थर से और समान विधि से निर्मित है. इसमें भी 72 लिंगों से युक्त 14 वृत्तों में कुल 1008 शिवलिंग बने हैं. इसकी स्थापना सहस्र शिवलिंग मंडपम् में की जाएगी. इस शिवलिंग पर सभी श्रद्धालु पूजा और जलाभिषेक कर सकेंगे.
श्री महावीर स्थान न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल के अनुसार छोटे शिवलिंग की व्यवस्था इसलिए की गई है. क्योंकि विराट रामायण मंदिर का निर्माण कार्य अभी जारी है. निर्माण के दौरान बड़े शिवलिंग की पूजा संभव नहीं है. जबकि प्रतिदिन श्रद्धालु पूजा के लिए आ रहे हैं. इसलिए अब भक्त बड़े शिवलिंग के छोटे रूप की पूजा कर सकेंगे.
शनिवार से शुरू है पूजा, मुंडन की भी है सुविधा
छोटे शिवलिंग की स्थापना पूजा शनिवार से ही शुरू हो गई है. स्थापना पूजा में यजमान जमीनदाता बने हैं. मंदिर परिसर के तालाब किनारे मंडप में शिवलिंग स्थापित किया जा रहा है. यहां एक पुजारी की नियुक्ति की गई है, जो नियमित पूजा-पाठ करेंगे. श्रद्धालुओं के लिए रुद्राभिषेक की भी व्यवस्था मंदिर की ओर से की जाएगी. निकट भविष्य में तालाब का सौंदर्यीकरण किया जाएगा और पूरे परिसर को शिवसागर क्षेत्र नाम दिया गया है. इस क्षेत्र को महत्वपूर्ण पेड़-पौधों से सजाकर आश्रम का रूप दिया जा रहा है. यहां लोग अपने बच्चों का मुंडन भी करा सकेंगे. मंदिर में जल चढ़ाने के लिए कुआं बनाने की व्यवस्था की जा रही है. साथ ही महावीर मंदिर की ओर से नैवेद्यम लड्डू का काउंटर भी खुलेगा. ज्योतिष परामर्श और धर्मग्रंथ उपलब्ध कराने की भी योजना है.
पांडुलिपियों से खोजी गई स्थापना विधि
इस स्थापना में शास्त्रीय विधि का पूरी तरह पालन किया जाएगा. मंदिर के शोध अधिकारी पंडित भवनाथ झा ने बताया कि महावीर मंदिर में हमेशा से शास्त्रीय सिद्धांतों का पालन होता रहा है. पद्मश्री आचार्य किशोर कुणाल भी शास्त्रों पर शोध कर उनके अनुसार ही कार्य करते थे. यह परियोजना उनका ड्रीम प्रोजेक्ट है. उन्होंने बताया कि सहस्र शिवलिंग स्थापना के कारण विशेष सावधानी आवश्यक है. प्राचीन काल की जो विधि आज प्रचलन में नहीं है, उसे हस्तलिखित पांडुलिपियों से खोजकर निकाला गया है.
भूपुर पीठ होगा स्थापित
उन्होंने आगे बताया कि इस शिवलिंग पर जल चढ़ाने से कुल 1072 देवी-देवताओं की आराधना का फल एक साथ मिलेगा. साथ ही यहां भूपुर पीठ की भी स्थापना होगी. इसपर 64 देवी देवताओं की स्थापना और पूजा होगी. कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के विद्वान डॉ. रामचंद्र झा और डॉ. शशिनाथ झा की अध्यक्षता में यह पूरा होगा. इस प्रकार यह शिवलिंग हाल के वर्षों में स्थापित शिवलिंगों से विशिष्ट माना जा रहा है.
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