Alwar News:अलवर और खैरथल-तिजारा में मावठ के बाद बढ़ती ठंड ने रबी की फसलों पर पाले का खतरा पैदा कर दिया है. कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को रात में हल्की सिंचाई करने और गंधक का छिड़काव करने की सलाह दी है ताकि सरसों, गेहूं और सब्जियों को नुकसान से बचाया जा सके. उद्यान विभाग ने किसानों से मौसम की निगरानी रखने और सतर्क रहने की अपील की है.
ठंड और शीतलहर की मार से फसलों को बचाने के लिए कृषि विशेषज्ञों ने कुछ अत्यंत प्रभावी तरीके सुझाए हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि जब भी पाले की आशंका हो, तो रात के समय खेतों में ‘हल्की सिंचाई’ (Light Irrigation) करना सबसे अधिक लाभकारी होता है. सिंचाई करने से मिट्टी में नमी की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे भूमि अधिक समय तक गर्मी को संजोकर रख सकती है. नमी युक्त जमीन का तापमान अचानक नीचे नहीं गिरता, जिससे फसलों के टिश्यूज जमने से बच जाते हैं. इसके अतिरिक्त, सरसों, गेहूं, चना और मटर जैसी फसलों में ‘गंधक’ (Sulphur) का छिड़काव करना एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है. गंधक न केवल पाले से रक्षा करता है बल्कि पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर उनकी बढ़वार में भी सहायक सिद्ध होता है.
सब्जी और गेहूं की फसलों पर रोगों का साया
उद्यान विभाग के अनुसार, मावठ के बाद की यह कड़ाके की ठंड सब्जी वर्गीय फसलों जैसे टमाटर, बैंगन और मिर्च के लिए काल साबित हो सकती है. शीतलहर के कारण पौधों की पत्तियां झुलस सकती हैं और फल खराब होने का अंदेशा बना रहता है. वहीं, गेहूं और जौ की फसलों में इस नमी और ठंड के कारण ‘दंगी रोग’ (Yellow Rust/Blight) फैलने की संभावना काफी बढ़ गई है. सरसों और चने के पौधों में फूल झड़ने की समस्या भी सामने आ रही है, जिसका सीधा असर भविष्य में होने वाले कुल उत्पादन पर पड़ेगा. किसान भाइयों को सलाह दी गई है कि वे अपने खेतों के चारों ओर शाम के समय धुआं करके भी तापमान को थोड़ा संतुलित रख सकते हैं, ताकि शीतलहर का सीधा प्रभाव पौधों पर न पड़े.
प्रशासनिक अपील और सतर्कता का महत्व
उद्यान विभाग के उपनिदेशक गोपाल लाल मीणा ने जिले के तमाम किसानों से अपील की है कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों पर लगातार नजर रखें. उन्होंने जोर देकर कहा कि किसान अपनी मेहनत को बचाने के लिए समय रहते आवश्यक कदम उठाएं क्योंकि एक रात की लापरवाही पूरे सीजन की कमाई को मटियामेट कर सकती है. प्रशासन ने क्षेत्रीय कृषि पर्यवेक्षकों को भी निर्देश दिए हैं कि वे गांवों का दौरा कर किसानों को पाले से बचाव के तरीकों के बारे में जागरूक करें. अलवर और खैरथल-तिजारा के किसानों के लिए अगले 72 घंटे अत्यंत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं. यदि सही समय पर सिंचाई और उर्वरकों का प्रबंधन किया जाए, तो संभावित नुकसान को 80 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है.
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Vicky Rathore is a multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience in digital media, social media management, video production, editing, content writing, and graphic, A MAJMC gra…और पढ़ें
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