उन्होंने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद सामाजिक समरसता, स्वराज, स्वधर्म, स्वभाषा, नारी सशक्तिकरण, गुरुकुलीय शिक्षा प्रणाली और वैदिक ज्ञान-विज्ञान के प्रबल समर्थक थे। वे धर्मांतरण, विदेशी दासता और कुसंस्कृति के विरोधी रहे। उनके महाप्रयाण के सौ वर्ष बाद भी उनके विचार समाज को दिशा देने का कार्य कर रहे हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सीकर के पूर्व सांसद एवं आर्य संन्यासी स्वामी सुमेधानंद सरस्वती ने की। इस अवसर पर दर्शनाचार्य विमलेश आर्या, श्रीमद् दयानंद सत्यार्थ प्रकाश न्यास के अध्यक्ष अशोक आर्य, स्वामी देवव्रत सरस्वती, आचार्य आर्य नरेश, आचार्या सूर्या चतुर्वेदा, प्रकाश आर्य और जितेंद्र भाटिया सहित अनेक विद्वान और संत उपस्थित रहे। वक्ताओं ने स्वामी श्रद्धानंद के जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्र और संस्कृति की रक्षा के लिए एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया तथा उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया।
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मेवाड़ की पावन नगरी उदयपुर में सत्यार्थ प्रकाश शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में गुलाब बाग स्थित हाथी वाला पार्क में भव्य समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने समाज को कट्टरपंथी विचारधाराओं से सावधान रहने का आह्वान किया।
गुलाब बाग स्थित नवलखा महल में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए विनोद बंसल ने स्वामी श्रद्धानंद के जीवन और बलिदान का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1926 में स्वामी श्रद्धानंद की हत्या करने वाली उग्र मानसिकता से समाज को आज भी सतर्क रहने की आवश्यकता है। उनके अनुसार स्वामी श्रद्धानंद का जीवन राष्ट्र, धर्म और समाज सेवा के प्रति समर्पण का प्रेरक उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद सामाजिक समरसता, स्वराज, स्वधर्म, स्वभाषा, नारी सशक्तिकरण, गुरुकुलीय शिक्षा प्रणाली और वैदिक ज्ञान-विज्ञान के प्रबल समर्थक थे। वे धर्मांतरण, विदेशी दासता और कुसंस्कृति के विरोधी रहे। उनके महाप्रयाण के सौ वर्ष बाद भी उनके विचार समाज को दिशा देने का कार्य कर रहे हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सीकर के पूर्व सांसद एवं आर्य संन्यासी स्वामी सुमेधानंद सरस्वती ने की। इस अवसर पर दर्शनाचार्य विमलेश आर्या, श्रीमद् दयानंद सत्यार्थ प्रकाश न्यास के अध्यक्ष अशोक आर्य, स्वामी देवव्रत सरस्वती, आचार्य आर्य नरेश, आचार्या सूर्या चतुर्वेदा, प्रकाश आर्य और जितेंद्र भाटिया सहित अनेक विद्वान और संत उपस्थित रहे। वक्ताओं ने स्वामी श्रद्धानंद के जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्र और संस्कृति की रक्षा के लिए एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया तथा उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया।
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