चिराग भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर के दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। पासवान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य भारत को दुनिया का ‘फूड बास्केट’ बनाना है, ताकि विश्व के हर डाइनिंग टेबल तक कम से कम एक भारतीय खाद्य उत्पाद पहुंचे। एक समय देश में खाद्यान्न की कमी थी, लेकिन आज भारत सरप्लस उत्पादन करने वाला देश बन चुका है। अब चुनौती उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण और गुणवत्ता सुधार की है।
सेहत से समझौता किसी हाल में नहीं
खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार सृजन में अहम भूमिका निभा रहा है। सरकार का लक्ष्य प्रसंस्करण का प्रतिशत 12 से बढ़ाकर 25 प्रतिशत तक ले जाना है। पासवान ने बताया कि उदयपुर चिंतन शिविर में देश के 30 राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और बेस्ट प्रैक्टिस व सुझावों पर मंथन किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि खाद्य प्रसंस्करण का मतलब गुणवत्ता सुधार है, न कि सेहत से समझौता।
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इंक्यूबेशन सेंटर का किया उद्धाटन
अपनी यात्रा के दौरान चिराग ने उदयपुर के बलीचा मंडी स्थित फल मंडी में जामुन, सीताफल और आंवला फ्रूट प्रोसेसिंग इंक्यूबेशन सेंटर का भी उद्घाटन किया। यह राजस्थान का पहला ऐसा केंद्र है, जिससे स्थानीय किसानों को फलों के बेहतर दाम मिलेंगे और राज्य खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेगा।
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