ब्रेस्ट कैंसर को आम तौर पर महिलाओं की बीमारी माना गया, लेकिन चौंकाने वाला आंकड़ा है कि राजस्थान में हर साल 250 से 300 केस पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर के आ रहे हैं, वो भी तीसरी-चौथी स्टेज में, जहां इलाज बेहद जटिल हो जाता है। वरिष्ठ मेडिकल आंकोलोजिस्ट डॉ.
ब्रेस्ट कैंसर में महिला पुरुष का क्या फर्क? पुरुषों में स्तन कैंसर अक्सर 50–70 वर्ष की आयु में पाया जाता है। महिलाओं की तुलना में पुरुषों में यह बीमारी 10-15 वर्ष बाद सामने आती है। एल्कोहल, नशा, बीड़ी-सिगरेट सहित जेनेटिक कारण जुड़े होते हैं। स्टेज के अनुसार पुरुष और महिला दोनों में इलाज के परिणाम लगभग समान होते हैं। पुरुषों में खराब प्रोग्नोसिस का मुख्य कारण बीमारी की देर से पहचान है, न कि बीमारी की आक्रामकता।
शर्म और झिझक से बनी ऐसी गंभीर तस्वीर
स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में रिपोर्टर ऐसे मरीजों से मिला। सिकराय के बबलू (45) ने बताया- दो साल पहले छाती में हल्की गांठ हुई। फिर पानी निकलने लगा। शर्म के मारे किसी को बताया नहीं। गांठ बड़ी हो गई, दर्द बढ़ गया। दिखाया तो ब्रेस्ट कैंसर की चौथी स्टेज शुरू होने का पता चला। सहीराम (47) की पत्नी सुगमा ने बताया- ये फुंसी ही बताते रहे, गांठ बढ़ती गई। 6 माह पहले पता चला कि ब्रेस्ट कैंसर हो गया।
भास्कर एक्सपर्ट- डॉ. संदीप जसूजा सुपरिटेंडेंट, स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट; डॉ. ललित मोहन शर्मा वरिष्ठ मेडिकल आंकोलोजिस्ट
स्तन पर छोटी सी फुंसी छिपाने वाले पुरुष जानलेवा बीमारी पाल रहे हैं। हर साल 250 से ज्यादा पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर केस आ रहे हैं। स्तन पर गांठ, निपल से पानी निकलना, अंदर धंसना या त्वचा बदले तो जांच कराएं। परिवार में स्तन कैंसर का इतिहास हो तो नियमित परामर्श लें। सीने पर पहले रेडिएशन हुआ हो तो सतर्क रहें ✔पुरुषों में भी स्तन कैंसर होता है। इसे सिर्फ महिलाओं की बीमारी नहीं मानें।
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