Uttarakhand News: उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले में भूजल तेजी से गिरने को लेकर प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है. पानी बचाने के मकसद से इस बार गर्मी में धान की खेती पर पूरी तरह रोक लगाने का फैसला किया गया है. इस फैसले से हजारों किसानों पर असर पड़ने वाला है.
जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने बताया कि इस दौरान धान की नर्सरी तैयार करने, बुआई और रोपाई-तीनों पर रोक रहेगी. उन्होंने कहा कि यह पाबंदी तराई क्षेत्र के दूसरे हिस्सों, जैसे नैनीताल और हरिद्वार के कुछ इलाकों में भी लगाई जा सकती है और इस साल किसी तरह की छूट नहीं दी जाएगी. पिछले साल भी कुछ समय के लिए ऐसा प्रतिबंध लगाया गया था, लेकिन किसानों से बातचीत के बाद उसे हटा लिया गया था.
अधिकारियों के मुताबिक जिले में आमतौर पर करीब 22 हजार हेक्टेयर जमीन पर गर्मी का धान बोया जाता है. यहां ज्यादातर किसान एक से दो हेक्टेयर की छोटी जोत पर खेती करते हैं, इसलिए इस फैसले से उनकी आमदनी पर सीधा असर पड़ेगा. प्रशासन का कहना है कि यह फैसला कृषि वैज्ञानिकों और किसान संगठनों से सलाह लेने के बाद किया गया है.
पिछले दस सालों में जिले में भूजल स्तर करीब 70 फीट तक गिर चुका है. जसपुर और काशीपुर जैसे इलाके पहले ही ‘गंभीर’ श्रेणी में आ चुके हैं. अधिकारियों का मानना है कि धान की खेती भूजल के ज्यादा दोहन की सबसे बड़ी वजह है. प्रशासन ने किसानों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि यह कदम भविष्य में पानी बचाने के लिए जरूरी है.
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