महज 15 वर्ष की उम्र में पारिवारिक परिस्थितियों के कारण फूलसिंह मीणा को पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी. जीवन की जिम्मेदारियों के बोझ तले शिक्षा का सपना कहीं दब गया, लेकिन भीतर सीखने की ललक कभी खत्म नहीं हुई. वर्षों बाद यह सपना तब फिर से जागा, जब उनकी पांच बेटियों ने उन्हें दोबारा पढ़ाई शुरू करने के लिए प्रेरित किया. पत्नी शांति देवी के प्रोत्साहन ने भी उन्हें नई ऊर्जा दी. 55 वर्ष की उम्र में उन्होंने फिर से कलम थामी और लगभग 40 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर छात्र बनकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचे.
राजनीति और पढ़ाई का संतुलन
विधायक फूलसिंह मीणा का मानना है कि यदि राजनीति को साफ और सुशासनयुक्त बनाना है, तो जनप्रतिनिधियों का शिक्षित होना बेहद जरूरी है. इसी सोच के साथ उन्होंने राजनीति विज्ञान को उच्च शिक्षा का विषय चुना. एक सक्रिय विधायक होने के कारण उनकी दिनचर्या बेहद व्यस्त रहती है, इसके बावजूद वे पढ़ाई के लिए समय निकालते रहे. सहयोगियों के अनुसार, वे क्षेत्र के दौरों के बीच भी पढ़ाई जारी रखते हैं. कार में सफर के दौरान ऑडियो नोट्स सुनना और खाली समय में किताबें पढ़ना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है.
जिम्मेदार पद पर रहते हुए भी शिक्षा को प्राथमिकता
लगातार तीसरी बार विधायक चुने गए फूलसिंह मीणा वर्तमान में विधानसभा की जनजाति कल्याण समिति के सभापति भी हैं. इसके बावजूद उन्होंने शिक्षा को कभी पीछे नहीं छोड़ा. उनका मानना है कि शिक्षा ही वह शक्ति है, जो समाज को आगे बढ़ा सकती है. इसी सोच के साथ वे समाज के अंतिम छोर तक शिक्षा का लाभ पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं.
बेटियों को आगे बढ़ाने की अनोखी पहल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान से प्रेरित होकर विधायक मीणा ने अपने क्षेत्र में बेटियों को प्रोत्साहित करने की एक अनोखी पहल शुरू की है. वे होनहार बेटियों को हवाई यात्रा कराकर उनका आत्मविश्वास बढ़ाते हैं, ताकि वे बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस जुटा सकें. उनका उद्देश्य है कि आर्थिक अभाव किसी भी बेटी की शिक्षा में बाधा न बने.
शिक्षा का सफर जो बना मिसाल
फूलसिंह मीणा का शिक्षा के प्रति सफर भी उतना ही प्रेरणादायक रहा है. वर्ष 2013 में चुनावी तैयारियों के बीच उन्होंने दसवीं की परीक्षा दी, जिसमें तीन विषयों में सफलता मिली. शेष दो विषय उन्होंने 2015 में पास किए. इसके बाद वर्ष 2017 में उन्होंने एकलिंगगढ़ स्थित केंद्रीय विद्यालय से 12वीं बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण की. अब 68 वर्ष की उम्र में एमए फाइनल की परीक्षा देना उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और लगन का प्रमाण है.
समाज के लिए प्रेरणास्रोत
फूलसिंह मीणा की यह यात्रा उन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है, जो किसी न किसी कारण से अपनी पढ़ाई अधूरी छोड़ चुके हैं. उनका संदेश बिल्कुल साफ है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो उम्र, हालात और जिम्मेदारियां भी इंसान के रास्ते में बाधा नहीं बन सकतीं.
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