Sanjay Vishwas Inspiring Story: कोलकाता के संजय बिश्वास ने आत्महत्या के विचारों से जूझने के बाद अपनी जिंदगी को नया मकसद दिया. कोरोना काल में कारोबार बंद होने से वे आर्थिक संकट में आ गए और दो बार आत्महत्या का प्रयास भी किया, लेकिन काउंसलिंग के बाद उन्होंने साइकिल यात्रा शुरू की. अब तक वे 71,000 किलोमीटर साइकिल चला चुके हैं और 26 राज्यों की दो-दो बार यात्रा कर चुके हैं. वे जगह-जगह जाकर लोगों को जीवन के प्रति सकारात्मक रहने और आत्महत्या से दूर रहने का संदेश दे रहे हैं.
संजय बिश्वास ने आत्महत्या के विचारों से जूझने के बाद अपनी जिंदगी को नया मकसद दिया
संजय बिश्वास की मुश्किलें कोरोना काल में शुरू हुईं. उन्होंने उत्तर प्रदेश में तीन कैफे खोले थे, लेकिन महामारी के दौरान तीनों बंद हो गए. कारोबार ठप होने से उनकी आर्थिक स्थिति बुरी तरह प्रभावित हुई. हालात इतने बिगड़ गए कि उन्होंने दो बार आत्महत्या का प्रयास किया. हालांकि दोनों बार वे बच गए. इसके बाद उन्होंने मनोवैज्ञानिकों से काउंसलिंग ली. काउंसलिंग के दौरान उन्हें सलाह दी गई कि वे खुद को घर में बंद न रखें और खुली हवा में बाहर निकलकर समय बिताएं.
26 राज्यों की दो-दो बार कर चुके हैं यात्रा
आर्थिक तंगी के बावजूद संजय ने हिम्मत जुटाई और एक साइकिल लेकर शहर में घूमना शुरू किया. धीरे-धीरे साइकिल चलाना उन्हें सुकून देने लगा. खुली हवा और लोगों से मुलाकात ने उनकी सोच बदल दी. यहीं से उन्होंने तय किया कि वे अपनी जिंदगी को नया मकसद देंगे और आत्महत्या के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाएंगे. संजय ने साइकिल यात्रा शुरू की और अब तक भारत के 26 राज्यों की दो-दो बार यात्रा कर चुके हैं. इसके अलावा वे बांग्लादेश और नेपाल भी साइकिल से जा चुके हैं.
उनकी साइकिल पर आगे की ओर आत्महत्या न करने का संदेश लिखा रहता है. वे अलग-अलग शहरों में स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर जाकर बच्चों और आमजन से संवाद करते हैं. वे लोगों को बताते हैं कि जीवन में कठिन दौर आता है, लेकिन उससे लड़कर ही आगे बढ़ा जा सकता है.
लोगों से साकारात्मक रहने की अपील की
उदयपुर में संजय दूसरी बार पहुंचे हैं. यहां सहेलियों की बड़ी स्थित पंडित जी की लेमन टी पर उन्होंने कई लोगों से मुलाकात की और अपनी कहानी साझा की. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे खुद भी सकारात्मक रहें और अपने परिचितों तक यह संदेश पहुंचाएं कि जीवन अनमोल है. संजय बिश्वास का मानना है कि अगर उनकी कहानी से एक भी व्यक्ति आत्महत्या का विचार छोड़ देता है, तो उनकी यात्रा सफल होगी. उनका सफर आज कई लोगों के लिए उम्मीद और प्रेरणा का प्रतीक बन चुका है.
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दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से News18 हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
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