कौशलेंद्र प्रताप सिंह ने फास्टेस्ट फिंगर फर्स्ट राउंड जीतकर हॉट सीट पर जगह बनाई और 10 हजार रुपये से खेल की शुरुआत की. उन्होंने लगातार 12 सवाल के सही जवाब देकर 12 लाख 50 हजार रुपये तक की राशि सुनिश्चित की. 13वें सवाल का सही उत्तर स्पष्ट न होने पर उन्होंने समझदारी दिखाते हुए खेल से बाहर निकलने का निर्णय लिया और कुल 13 लाख 30 हजार रुपये की पुरस्कार राशि अपने नाम की.
कोयला ढुलाई का करते हैं काम
खेल के दौरान कौशलेंद्र ने अमिताभ बच्चन को अपना परिचय देते हुए बताया कि वह कोयला ढुलाई के कार्य से जुड़े हैं और यही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है. उन्होंने भावुक होकर कहा कि बचपन में उनका सपना आईएएस अधिकारी बनने का था. लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वह आगे पढ़ाई नहीं कर सके. सीमित संसाधनों के बावजूद ज्ञान के प्रति उनका लगाव कभी कम नहीं हुआ. फिलहाल कौशलेंद्र पिछले तीन-चार वर्षों से धनबाद के जयप्रकाश नगर में अपने एक रिश्तेदार के यहां रह रहे हैं.
शो के दौरान जब अमिताभ बच्चन ने उनसे जीती गई रकम के उपयोग के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि वह यह राशि अपने तीन वर्षीय बेटे दक्ष और तीन माह की बेटी दीक्षा की पढ़ाई व परिवार की जरूरतों पर खर्च करेंगे. उन्होंने यह भी बताया कि बच्चों की शिक्षा के लिए बैंक में निवेश कर दिया गया है. ताकि भविष्य में आर्थिक परेशानी उनकी पढ़ाई में बाधा न बने.
पीढ़ियों ने नहीं देखा होगा सपना
केबीसी के मंच से अपने अनुभव साझा करते हुए कौशलेंद्र ने कहा आज मैं जिस कुर्सी पर बैठा हूं. वहां बैठने का सपना मेरी किसी पीढ़ी ने नहीं देखा था. यह मेरे जीवन का पहला अनुभव था जब मैं हवाई जहाज में बैठा, बड़े होटल में रुका और बिना किसी चिंता के समय पर खाना मिला. अगर थोड़ी और पढ़ाई कर पाया होता तो शायद यहां तक पहुंचने में 24 साल नहीं लगते.
खेल के दौरान कई सवाल झारखंड से जुड़े रहे, जिनका उन्होंने सटीक उत्तर दिया. बराकर नदी को दामोदर की सहायक नदी बताकर उन्होंने 40 हजार रुपये जीते. उलगुलान आंदोलन को भगवान बिरसा मुंडा से जोड़कर उन्होंने 80 हजार रुपये हासिल किए, साथ ही 80 हजार रुपये बोनस के रूप में भी मिले. ऑडियंस पोल और अन्य लाइफ लाइन का सही उपयोग कर उन्होंने अपनी जीत को लगातार आगे बढ़ाया.
11वें सवाल पर वीडियो कॉल लाइफ लाइन में मित्र से सहायता नहीं मिल पाई. लेकिन बोनस लाइफ लाइन के सहारे ऑडियंस पोल को पुन सक्रिय कर उन्होंने 6 लाख 40 हजार रुपये जीते. इस दौरान उनकी पत्नी सीमा देवी और बेटा स्क्रीन पर दिखाई दिए. पत्नी से बातचीत में उन्होंने कर्ज चुकाने की बात कही, जिस पर पत्नी ने हल्के-फुल्के अंदाज में जवाब दिया.
लोडिंग सुपरवाइजर का भी किया काम
कौशलेंद्र की प्रारंभिक शिक्षा झरिया के आईएसएल स्कूल से हुई. इंटरमीडिएट की पढ़ाई प्रयागराज से पूरी की, जबकि आर्थिक कारणों से स्नातक की पढ़ाई अधूरी रह गई. इसके बाद उन्होंने अपने पिता के कोयला व्यवसाय को संभालते हुए धनबाद की विभिन्न कोलियरियों में लोडिंग सुपरवाइजर के रूप में काम किया. उनके नाना और पिता भी कोयला व्यवसाय से जुड़े रहे हैं.
उन्होंने बताया कि बीते तीन साल से मोबाइल के माध्यम से केबीसी से जुड़े प्रश्नों का अभ्यास करते रहे और उसी मेहनत का परिणाम उन्हें हॉट सीट तक ले गया. केबीसी से उन्हें एक सोने का सिक्का, 13.30 लाख रुपये की राशि और दो वर्षों तक घी मिलने का पुरस्कार भी प्राप्त हुआ है. जिसका उपयोग उन्होंने पूजा-पाठ, दान और पारिवारिक जरूरतों में किया. कौशलेंद्र प्रताप सिंह की यह सफलता संघर्ष, धैर्य और निरंतर प्रयास की मिसाल है. जो यह साबित करती है कि हालात चाहे जैसे हों अगर हौसले बुलंद हों तो सपने जरूर पूरे होते हैं.
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