जिला अस्पताल की ओपीडी के बाहर मरीजों की कतार।
जिला अस्पताल की एमसीएच विंग में सर्दी की दस्तक के साथ ही मरीजों की संख्या बढ़ी है। शिशु रोग विभाग व गायनिक में ओपीडी में 25% से 30% की वृद्धि हुई है।
पिछले 10 दिन से हालत ये बने हुए हैं कि अब एक बेड पर दो-दो मरीजों को सुलाने की नौबत आ गई है। सुबह 9 से दोपहर 2 बजे तक एमसीएच विंग में पर्ची काउंटर, शिशु ओपीडी व गायनिक ओपीडी में लंबी कतारें लगी हैं।
गंदगी और बदबू के कारण यहां मरीजों को परेशानी हो रही है। 4-5 हजार लोगों की भीड़ के चलते जिला अस्पताल में अव्यवस्थाओं का आलम है।
एक साल से कम उम्र के बच्चों में निमोनिया और प्रसूताओं को बुखार
अधिकतर शिशु रोगियों में वायरल बुखार, निमोनिया, सांस में दिक्कत, सर्दी, खांसी, जुकाम के साथ ओरी (मिजल्स) के केस सामने आ रहे हैं। एक साल से कम उम्र के बच्चे में निमोनिया के केस बढ़े हैं। गायनिक विभाग में भी प्रसूताओं को बुखार, सर्दी, खांसी की समस्या अधिक हो रही है। अस्पताल में शिशु रोग ओपीडी सामान्य दिनों में 600 से 700 तक रहती है लेकिन इन दिनों 1000 से अधिक मरीज जांच के लिए पहुंच रहे हैं। प्रसूता व धात्री महिलाएं भी औसत 200 से अधिक जांच के लिए पहुंच रही हैं।
सर्दी का असर बढ़ने के साथ अस्पताल के शिशु रोग विभाग में एक साल से कम उम्र के बच्चों में निमोनिया के केस तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों से जांच के बाद मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। अस्पताल के वार्ड भी ओवर लोड हो गए हैं। एमसीएच विंग प्रभारी शिशु रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ. हरीश चौहान का कहना है कि ओपीडी में 25 प्रतिशत मरीजों की संख्या बढ़ी है। सामान्य दिनों में शिशु रोगी व गायनिक विभाग में 40 से 50 मरीज भर्ती किए जाते थे, अब उनकी संख्या 60-70 तक पहुंच गई है।
भास्कर एक्सपर्ट -डॉ. कमला वर्मा, गायनिक विभागाध्यक्ष
गायनिक ओपीडी में प्रसूताओं की तादाद बढ़ी, इम्यूनिटी कम
सर्दी बढ़ने के साथ ही प्रसूताओं व धात्री महिलाओं में वायरल बढ़ा है। वार्ड फुल है। ओपीडी में पहुंचने वाले मरीजों में अधिकतर बुखार, सर्दी, खांसी के केस आ रहे हैं। प्रसूताएं इम्यूनिटी कमजोर होने से बीमार हो रही हैं। 200 से अधिक मरीजों की जांच की जा रही है। बुखार पीड़ित प्रसूताओं को भर्ती भी किया जा रहा है। महिलाएं सर्दी से बचाव रखें। गर्म कपड़े पहनें।
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