पचपदरा (बाड़मेर) स्थित देश की सबसे हाई टेक रिफाइनरी में एचपीसीएल (राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड) का काम अंतिम दौर में है। सोमवार को पहली बार 700 किलोमीटर दूर मुंद्रा पोर्ट से 21 दिन में पाइप लाइन के जरिए क्रूड रिफाइनरी में पहुंचा है। ऐसे में उम्मीद है कि
मार्च तक पूरी क्षमता से क्रूड रिफाइन हो सकेगा पचपदरा में जनवरी 2026 से रिफाइनिंग प्रक्रिया शुरू हो गई है। मार्च तक यहां पूरी क्षमता के साथ कमर्शियल उत्पादन शुरू हो जाएगा। रिफाइनरी की प्रोसेसिंग यूनिटों का काम 99 प्रतिशत पूरा हो गया है। मंगला टर्मिनल से गुजरात की जामनगर रिफाइनरी तक पूर्व में हिटिंग पाइप लाइन बिछाई गई है। इसी पाइप लाइन से अब गुजरात के मुंद्रा पोर्ट से भी क्रूड को रिफाइन करने के लिए मंगवाया जा सकेगा। बाड़मेर से निकलने वाले क्रूड के अलावा अंतर्राष्ट्रीय बाजार से खरीद किए जा रहे क्रूड को भी रिफाइन किया जाएगा। यहां से राजस्थान को 5 हजार करोड़ का राजस्व मिलेगा।
जीरो लिक्विड डिस्चार्ज तकनीक, पर्यावरण को नुकसान नहीं होगा पचपदरा रिफाइनरी भारत की पहली ऐसी परियोजना है जो रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स का मिश्रण है। यह बीएस-6 मानक के ईंधन का उत्पादन करेगी। जीरो लिक्विड डिस्चार्ज तकनीक पर आधारित है, जिससे पर्यावरण को नुकसान नहीं होगा। बोरावास और कलावा में नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं। बालोतरा से रिफाइनरी तक 12 किमी. नई रेलवे लाइन बिछाने की भी स्वीकृति मिल गई है। ऐसे में ट्रेन से भी तेल और अन्य उत्पादों का आयात-निर्यात किया जा सकेगा।
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