Strawberry Farming Tips: स्ट्रॉबेरी की खेती किसानों के लिए अच्छा मुनाफा वाला सौदा है. जिसकी खेती ठंड के मौसम में पलामू के इलाके में की जाती है. अच्छी पैदावार के लिए हल्की दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. खेत की तैयारी के समय प्रति एकड़ 20-25 टन सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट डालना चाहिए.
स्ट्रॉबेरी की खेती किसानों के लिए अच्छा मुनाफा वाला सौदा है. जिसकी खेती ठंड के मौसम में पलामू के इलाके में की जाती है. अच्छी पैदावार के लिए हल्की दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. खेत की तैयारी के समय प्रति एकड़ 20-25 टन सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट डालना चाहिए. इससे मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ती है और जड़ों का विकास अच्छा होता है.

कृषि विशेषज्ञ डॉ.प्रमोद कुमार ने लोकल18 को बताया कि अधिक और गुणवत्तापूर्ण पाने के लिए जैविक खाद का प्रयोग जरूरी है. नीम खली 2–3 क्विंटल प्रति एकड़ डालने से मिट्टी में पोषक तत्व बढ़ते हैं और कीट-रोग भी कम होते हैं. साथ ही ट्राइकोडर्मा या पीएसबी जैसे जैव उर्वरक मिलाने से पौधों की सेहत सुधरती है.

उन्होंने कहा कि स्ट्रॉबेरी में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की संतुलित मात्रा आवश्यक होती है. प्रति एकड़ लगभग 60-80 किलो नाइट्रोजन, 40-50 किलो फास्फोरस और 40-50 किलो पोटाश देना लाभकारी रहता है. नाइट्रोजन को 2-3 भागों में देना चाहिए ताकि पौधों पर अधिक दबाव न पड़े.
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उन्होंने आगे कहा कि अधिक फल सेट के लिए जिंक, बोरॉन और कैल्शियम जैसे सूक्ष्म तत्व बहुत जरूरी हैं. जिंक सल्फेट और बोरॉन का 0.2% घोल बनाकर पत्तियों पर छिड़काव करने से फूल झड़ना कम होता है और फल का आकार अच्छा बनता है.

उन्होंने कहा कि फूल आने के समय पोटाश आधारित घुलनशील खाद (13:0:45) का 1% घोल छिड़कने से फल की संख्या और मिठास दोनों बढ़ती हैं. इसके अलावा सी-वीड एक्सट्रैक्ट या ह्यूमिक एसिड का प्रयोग भी उत्पादन बढ़ाने में सहायक होता है.

उन्होंने आगे कहा कि स्ट्रॉबेरी में नमी बहुत महत्वपूर्ण होती है. ड्रिप सिंचाई से पानी और खाद दोनों की बचत होती है. प्लास्टिक या जैविक मल्चिंग करने से खरपतवार कम होते हैं, मिट्टी में नमी बनी रहती है और फल जमीन से खराब नहीं होते.

उन्होंने आगे बताया कि स्वस्थ पौधे ही ज्यादा फल देते हैं. लाल मकड़ी, थ्रिप्स और फफूंद रोगों से बचाव के लिए नीम आधारित दवाओं या अनुशंसित दवाओं का समय पर छिड़काव जरूरी है. रोगग्रस्त पत्तियों को खेत से बाहर निकाल देना चाहिए.
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