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Gardening Tips: अक्सर लोग सिकी हुई मूंगफली खाने के बाद उसके छिलकों को बेकार समझकर फेंक देते हैं, लेकिन ये कई तरह से उपयोगी होते हैं. मूंगफली के छिलके पौधों के लिए प्राकृतिक खाद, मिट्टी की नमी बनाए रखने और कम्पोस्ट बनाने में मददगार हैं. इसके अलावा इन्हें घरेलू सफाई और गार्डनिंग में भी इस्तेमाल किया जा सकता है. सही तरीके से उपयोग करने पर ये छिलके कचरा नहीं बल्कि घर के लिए एक उपयोगी संसाधन बन सकते हैं.
भीलवाड़ा – अक्सर लोग सिकी हुई मूंगफली खाने के बाद उसके छिलकों को बेकार समझकर कचरे में फेंक देते हैं, जबकि यही छिलके कई तरह से उपयोगी साबित हो सकते हैं. पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक जीवनशैली के दौर में ऐसे घरेलू अपशिष्ट का सही उपयोग बेहद जरूरी है. मूंगफली के छिलकों का वापस प्रयोग करके न केवल कचरा कम किया जा सकता है बल्कि गार्डनिंग और घरेलू जरूरतों में भी लाभ लिया जा सकता है.

सिकी हुई मूंगफली के छिलकों का सबसे बेहतर उपयोग पौधों के लिए जैविक खाद के रूप में किया जा सकता है. इन छिलकों को पहले अच्छी तरह सुखाना चाहिए ताकि नमी खत्म हो जाए. इसके बाद इन्हें हल्का पीसकर गमलों या क्यारियों की मिट्टी में मिलाया जा सकता है. छिलके धीरे धीरे सड़ते हैं और मिट्टी को पोषक तत्व प्रदान करते हैं. इससे मिट्टी की बनावट सुधरती है और जड़ों को हवा मिलने में मदद मिलती है. नियमित उपयोग से पौधों की वृद्धि अच्छी होती है और रासायनिक खाद पर निर्भरता भी कम हो जाती है.

मूंगफली के छिलकों को मल्च के रूप में इस्तेमाल करना भी काफी फायदेमंद माना जाता है. पौधों की जड़ों के आसपास इन छिलकों की परत बिछाने से मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है. इससे बार बार पानी देने की जरूरत कम हो जाती है. गर्मी के मौसम में यह परत जड़ों को तेज धूप से बचाती है. इसके साथ ही मल्च खरपतवार उगने से भी रोकता है. जिससे पौधों को पूरा पोषण मिलता है. छोटे गार्डन और बालकनी गार्डन में यह तरीका काफी कारगर साबित होता है.
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सिकी हुई मूंगफली के छिलकों को जलाकर बनाई गई राख का भी उपयोग किया जा सकता है. इस राख को पौधों की मिट्टी में हल्की मात्रा में मिलाने से चींटियां और कुछ अन्य हानिकारक कीट दूर रहते हैं. राख में मौजूद खनिज तत्व मिट्टी के लिए सहायक होते हैं. इसका प्रयोग सीमित मात्रा में करना चाहिए ताकि मिट्टी का संतुलन बिगड़े नहीं. ग्रामीण क्षेत्रों में यह तरीका लंबे समय से अपनाया जाता रहा है और आज भी प्राकृतिक खेती में इसे उपयोगी माना जाता है. यह पूरी तरह रसायन मुक्त उपाय है.

जो लोग घर पर कम्पोस्ट बनाते हैं उनके लिए मूंगफली के छिलके बहुत उपयोगी होते हैं. किचन वेस्ट जैसे सब्जियों के छिलके और बचे हुए पत्तों के साथ इन्हें कम्पोस्ट ड्रम या गड्ढे में डाला जा सकता है. यह सूखा पदार्थ होने के कारण गीले कचरे के साथ संतुलन बनाता है. इससे कम्पोस्ट जल्दी तैयार होती है और उसमें बदबू भी नहीं आती. कुछ ही समय में यह मिश्रण उत्तम जैविक खाद में बदल जाता है जो सभी प्रकार के पौधों के लिए लाभदायक होती है.

मूंगफली के छिलकों का उपयोग करते समय कुछ सावधानियां बरतना भी जरूरी है.अगर छिलकों में नमक या मसाले लगे हों तो उन्हें सीधे पौधों में नहीं डालना चाहिए। पहले पानी से अच्छी तरह धोकर सुखाना जरूरी होता है. अधिक मात्रा में एक साथ छिलके डालने से भी बचना चाहिए. सही तरीके और सीमित मात्रा में उपयोग करने पर ही इनका पूरा लाभ मिलता है. इस तरह सिकी हुई मूंगफली के छिलके कचरा न होकर घर और बगीचे के लिए उपयोगी प्राकृतिक संसाधन बन जाते हैं और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देते हैं.
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