भोपाल निवासी वन्यजीव संरक्षण कार्यकर्ता अजय दुबे द्वारा दायर याचिका में बताया गया है कि विश्व में बाघों की कुल संख्या 5,421 है, जिनमें से 3,167 भारत में पाए जाते हैं। नवीनतम जनगणना के अनुसार मध्य प्रदेश में 785 बाघ हैं। इसके बावजूद वर्ष 2025 में प्रदेश में अब तक 54 बाघों की मौत हो चुकी है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 में 43, वर्ष 2023 में 45 और वर्ष 2024 में 46 बाघों की मौत दर्ज की गई थी।
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याचिका में कहा गया है कि वर्ष 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत के बाद 2025 ऐसा वर्ष है, जिसमें सबसे अधिक बाघों की मौत हुई है। वर्ष 2025 के शुरुआती हफ्तों में ही प्रदेश में 6 बाघों की मौत दर्ज की जा चुकी है। जहां एक ओर सरकारी आंकड़े बाघों की संख्या में वृद्धि की सराहना कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जंगलों में बाघ रहस्यमयी और संदिग्ध परिस्थितियों में मर रहे हैं।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार लगभग 57 प्रतिशत बाघों की मौतें अप्राकृतिक मानी गई हैं, जिनके पीछे शिकार, करंट लगना या संदिग्ध हालात प्रमुख कारण हैं। तस्वीरें और खुफिया जानकारियां दर्शाती हैं कि मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में शिकार की गतिविधियां कोई नई बात नहीं हैं।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि मध्य प्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स और वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो ने संयुक्त कार्रवाई में अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी के कथित सरगना यांगचेन लखुंगपा को 2 दिसंबर 2025 को उत्तर सिक्किम के लाचुंग से गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियों के अनुसार उसका नेटवर्क भारत, नेपाल, तिब्बत और चीन तक फैला हुआ था।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और शहडोल फॉरेस्ट सर्कल में वर्ष 2021, 2022 और 2023 के दौरान हुई बाघों की मौत और शिकार की घटनाओं की जांच के लिए गठित समिति की रिपोर्ट का भी याचिका में हवाला दिया गया है। समिति के अध्यक्ष एवं स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स के प्रभारी ने अपनी रिपोर्ट में स्वीकार किया है कि कई मामलों में पोस्टमार्टम के दौरान न तो वीडियोग्राफी की गई और न ही प्रारंभिक अपराध रिपोर्ट दर्ज की गई। कई मामलों में पशु चिकित्सकों की अनुपस्थिति और जांच में लापरवाही भी सामने आई है।
याचिका में यह भी बताया गया है कि प्रधान मुख्य वन संरक्षक (भोपाल) द्वारा 12 दिसंबर 2025 को लिखे गए आधिकारिक पत्र में स्वीकार किया गया था कि मध्य प्रदेश में बाघों और अन्य वन्यजीवों की मौतें इलेक्ट्रोक्यूशन, सड़क दुर्घटना और रेल हादसों के कारण हो रही हैं। पत्र में वन विभाग के लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए थे।
बुधनी-मिडघाट रेलवे लाइन बनी ‘डेथ ट्रैक’
याचिका में कहा गया है कि रातापानी टाइगर रिजर्व के कोर एरिया से गुजरने वाली बुधनी-मिडघाट रेलवे लाइन वन्यजीवों के लिए डेथ ट्रैक बन चुकी है। वर्ष 2025 में इस रेलवे ट्रैक पर ट्रेन से टकराने के कारण 9 बाघों और 10 तेंदुओं की मौत हो चुकी है। विशेषज्ञों द्वारा अंडरपास और ओवरपास निर्माण की सिफारिश की गई थी, लेकिन इन्हें लागू नहीं किया गया।
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याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की है कि राज्य में बाघों के शिकार पर नियंत्रण के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, विशेषज्ञों की सिफारिशों को तत्काल लागू किया जाए और रेलवे विभाग के साथ समन्वय कर रातापानी क्षेत्र में आवश्यक अंडरपास और ओवरपास का निर्माण कराया जाए।
इस याचिका में केंद्र और राज्य सरकार के वन एवं पर्यावरण विभाग तथा नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी को अनावेदक बनाया गया है। युगलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए सभी अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी और अलका सिंह ने पैरवी की। कोर्ट ने बाघ शिकार से संबंधित एक अन्य याचिका के साथ इस मामले की संयुक्त सुनवाई करने के आदेश भी दिए हैं।
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