जांच में सामने आया कि आरोपी चोरी करने के उद्देश्य से जोधपुर आए थे। उन्होंने शहर के अलग-अलग इलाकों में रेकी की और वारदात को अंजाम देने के लिए एक बाइक भी चोरी की। नकबजनी के बाद आरोपी फरार हो गए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने 200 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाले, जिनके आधार पर आरोपियों के बांसवाड़ा और उदयपुर क्षेत्र से आने के सुराग मिले। इसके बाद पुलिस टीम बांसवाड़ा रवाना हुई और स्थानीय स्तर पर जानकारियां जुटाईं। पुलिस ने बांसवाड़ा से तीनों आरोपियों रणदीप सिंह, दीपक सिंह और तीरथ सिंह को गिरफ्तार किया। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी आपस में जीजा, साला और ससुर हैं और सिकलीगर समुदाय से जुड़े हुए हैं।
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पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि वारदात के बाद आरोपी जल्दबाजी में एक होटल पहुंचे और आनन-फानन में चेकआउट किया। होटल संचालक के पूछने पर उन्होंने नानी की मृत्यु का बहाना बनाकर वहां से निकलने की बात कही। इसके बाद वे पिंडवाड़ा होते हुए बांसवाड़ा पहुंचे, जहां चोरी का सामान छुपाकर पूरे परिवार सहित फरार हो गए।
माल बरामदगी के दौरान पुलिस को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, क्योंकि आरोपी स्थानीय भाषा में बातचीत करते थे। इसके बावजूद पुलिस टीमों ने तकनीकी संसाधनों का उपयोग कर चोरी का पूरा माल बरामद करने में सफलता हासिल की।
पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश ने बताया कि इस खुलासे में अहम भूमिका निभाने वाले कैलाश, मोतीलाल और राजाराम मीणा सहित पुलिस टीम को सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने आमजन से अपील की कि सूने मकानों में कीमती सामान और नकदी न छोड़ें। यदि बाहर जाना जरूरी हो तो संबंधित थाना पुलिस को इसकी सूचना अवश्य दें।
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