जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था का आकार बीते कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है लेकिन इसके साथ सरकार पर कर्ज का बोझ भी तेजी से बढ़ता गया है। स्थिति यह है कि प्रदेश पर मौजूद कुल कर्ज अब सरकार के पूरे साल के बजट से भी ज्यादा हो चुका है जिससे वित्तीय दबाव और विकास की चुनौती साफ दिखाई देने लगी है।
बजट के अनुसार 2024-25 के अंत तक प्रदेश पर कुल देनदारियां 1,37,067 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी हैं। इसके मुकाबले 2026-27 के लिए सरकार ने 1,13,767 करोड़ रुपये का कुल बजट प्रस्तावित किया है। यानी सरकार पर चढ़ा कर्ज पूरे साल के बजट से करीब 23 हजार करोड़ रुपये ज्यादा है। यह स्थिति बताती है कि सरकार को खर्च चलाने और दायित्व निभाने के लिए लगातार उधारी का सहारा लेना पड़ रहा है।
कर्ज को प्रदेश की आर्थिक क्षमता से जोड़कर देखें तो तस्वीर और साफ होती है। 2025-26 में जम्मू कश्मीर की सकल राज्य घरेलू उत्पाद यानी जीएसडीपी 2,88,422 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। इसके मुकाबले कुल कर्ज जीएसडीपी के करीब 48 प्रतिशत के बराबर पहुंच चुका है। आसान शब्दों में कहें तो प्रदेश साल भर में जितना कमाता है, उसका लगभग आधा हिस्सा कर्ज के बराबर हो गया है।
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.