स्टेट क्राइम रिकाॅर्ड ब्यूरो से वाहन डेटा एक पुलिसकर्मी के चचेरे भाई ने लीक किया था। इसके बदले उसके भाई ने डेटा चोरी कर बाजार में बेचने वाली गुजरात की गैंग से 50 हजार रुपए लिए थे। इस गैंग के पास केन्द्रीय परिवहन मंत्रालय से डेटा लेने के लिए जरूरी एपीआई मिली है। इससे वे परिवहन मंत्रालय के सिस्टम में सेंध मार कर डेटा चुरा रहे थे। पुलिसकर्मी का भाई पाली निवासी करमवीर दिल्ली में वेबसाइट डवलप करने का काम करता है। डेटा चोरी करने वाले राजकोट निवासी चिंतन वाडनीया भी वेबसाइट डवलपर है। पुलिसकर्मी की भूमिका की पड़ताल होना बाकी है। परिवहन मंत्रालय डेटा उपयोग के लिए सरकारी एजेंसियों को एपीआई एक्सेस देता है। प्रदेश में इसका उपयोग राजकॉप के जरिए एसएसओ आईडी से किया जाता है। करमवीर ने पुलिसकर्मी से किसी बहाने से पुलिस का क्रेडेंशियल हथिया लिया। इसे चिंतन को बेच दिया। एसएसओ आईडी से गिरोह ने एक्सेस किया। एक्सेस टोकने के बाद गिरोह वाहनों की जानकारी जुटाने लगा। रोज पांच लाख हिट हुए तो चेता मंत्रालय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को कुछ माह पहले डेटा चोरी होने की खबर लगी थी। पोर्टल पर रोज करीब पांच लाख यूजर पहुंच रहे थे। यह आंकड़ा चौंकाने वाला था। अनाधिकृत पोर्टल पर यह डेटा देख मंत्रालय ने एससीआरबी से जुड़े एपीआई लिंक को कुछ समय के लिए सस्पेंड कर दिया था। एससीआरबी का काम देख रहे डीओआईटी के संयुक्त निदेशक अनिल शर्मा ने डेटा चोरी करने वालों की पहचान के लिए राज्य साइबर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। एक आरसी के बदले वसूल रहे थे बीस रुपए
गुजरात के गिरोह के साथ ही कुछ दिन पहले मुम्बई के नालासोपारा से जनसेवा केन्द्र के संचालक व उसके साथी को पकड़ा। उसने पुलिस को बताया कि उसे यह डेटा एक टेलीग्राम चैनल से मिलता था। एक आरसी की जानकारी के बदले बीस रुपए का भुगतान करता था। उनसे यह आरसी और अन्य जानकारी प्राइवेटी बीमा कम्पनी व अन्य लोग लेते थे। बीस रुपए में से कुछ हिस्सा चैनल होस्ट करने वाला लेता था। एक आरसी के बदले वसूल रहे थे बीस रुपए
गुजरात के गिरोह के साथ ही कुछ दिन पहले मुम्बई के नालासोपारा से जनसेवा केन्द्र के संचालक व उसके साथी को पकड़ा। उसने पुलिस को बताया कि उसे यह डेटा एक टेलीग्राम चैनल से मिलता था। एक आरसी की जानकारी के बदले बीस रुपए का भुगतान करता था। उनसे यह आरसी और अन्य जानकारी प्राइवेटी बीमा कम्पनी व अन्य लोग लेते थे। बीस रुपए में से कुछ हिस्सा चैनल होस्ट करने वाला लेता था।
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