चंडीगढ़ | सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में जिस साक्ष्य के आधार पर सजा का फैसला हुआ है उसी पर मंगलवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सवाल उठाए गए। संबंधित गोलियों की कोर्ट में भौतिक रूप से जांच की गई। चीफ जस्टिस शील नागू, जस्टिस विक्रम अग्रवाल की बेंच ने कहा, गोलियों पर कुछ स्पष्ट नहीं दिखाई दे रहा। सीबीआई की तरफ से इन गोलियों पर हस्ताक्षर का दावा किया गया था। डेरा प्रमुख रहीम सिंह की तरफ से कहा कि छत्रपति के शव में मिली गोली बरामद हथियार से मेल ही नहीं खाती है। ऐसे में साक्ष्य संदेहास्पद है। इसके अलावा बुलेट सील बंद ही रही तो इसकी फॉरेंसिंक जांच किस समय हुई। इस मामले में आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ डेरा प्रमुख की अपील पर हाईकोर्ट ने दोबारा सुनवाई शुरु की है। बचाव पक्ष ने कहा-बेहद छोटी गोली पर हस्ताक्षर असंभव अभियोजन की ओर से कहा गया कि एफएसएल विशेषज्ञ के हस्ताक्षर रिवॉल्वर के बॉडी, ड्रम और बैरल पर मौजूद हैं जो जांच के बाद किए गए। हालां॑॑कि बचाव पक्ष ने इस तर्क को अविश्वसनीय बताते हुए कहा कि मानव शरीर से निकली विकृत और बेहद छोटी गोली पर किसी भी प्रकार के हस्ताक्षर या निशान होना भौतिक रूप से असंभव है। बचाव पक्ष ने कहा कि हथियार के बैरल पर निशान संभव हो सकते हैं लेकिन शरीर से निकली गोली पर नहीं। यह स्पष्टीकरण गलत और अविश्वसनीय है।
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