चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम आदेश जारी करते हुए यह स्पष्ट किया कि गृहिणी का कार्य केवल देखभाल तक सीमित नहीं होता बल्कि इसमें ऐसे अनेक दायित्व शामिल होते हैं जिनके लिए बाजार में भारी पारिश्रमिक देना पड़ता है। कोर्ट ने महिला की भूमिका को परिवार में अहम व अति मूल्यवान मानते हुए मोटर दुर्घटना में 100 प्रतिशत दिव्यांग महिला की मुआवजा राशि को 58.22 लाख से बढ़ाकर 1.18 करोड़ कर दिया है।
जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने कहा कि गृहिणी का कार्य क्षेत्र अत्यंत व्यापक है जिसमें पूरे परिवार के लिए भोजन तैयार करना, किराना व घरेलू सामान की खरीद, घर और आसपास की सफाई व रखरखाव, वित्तीय योजना और बजट प्रबंधन, बच्चों की देखभाल व शिक्षा, बुजुर्गों की सेवा, मरम्मत कार्यों का समन्वय तथा घर पर स्वास्थ्य देखभाल जैसी सेवाएं शामिल हैं। यदि ये सेवाएं खुले बाजार से ली जाएं तो इसके लिए भारी भुगतान करना पड़ेगा जो परिवार की स्थिरता में गृहिणी की केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है।
अपील मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत सिरसा के दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) द्वारा वर्ष 2016 में दिए गए मुआवजे के खिलाफ दायर की गई थी। अधिकरण ने 8 अक्तूबर 2014 को हुई सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुई शिल्पा जैन (अब दिवंगत) को 9% वार्षिक ब्याज सहित 58.22 लाख का मुआवजा दिया था। अपीलकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि अधिकरण द्वारा दिया गया मुआवजा अत्यंत अपर्याप्त है और इससे पीड़िता को हुई वास्तविक आर्थिक व गैर-आर्थिक क्षति की भरपाई नहीं होती। हाईकोर्ट ने माना कि पीड़िता एक गृहिणी थी और अधिकरण ने उसकी काल्पनिक आय बहुत कम आंकी थी जो स्थापित कानून के विपरीत है। अदालत ने कहा कि गृहिणी को केवल कुशल श्रमिक के बराबर नहीं आंका जा सकता क्योंकि वह घर की प्रबंधक के रूप में बहुआयामी भूमिका निभाती है। महंगाई, जीवन-यापन की बढ़ती लागत और न्यायिक दृष्टिकोण में आए बदलावों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने दिवंगत की काल्पनिक मासिक आय 15,000 निर्धारित की।
अदालत ने यह भी पाया कि पीड़ा और कष्ट जैसे गैर-आर्थिक मदों में दिया गया मुआवजा अपर्याप्त था। रिकॉर्ड के अनुसार पीड़िता को गंभीर सिर की चोटें आई थीं, मस्तिष्क में कई रक्तस्राव हुए थे, वह वेंटिलेटर पर रही और दुर्घटना की तारीख से लेकर 21 नवंबर 2017 को मृत्यु तक ऐसे ही रहीं। कुल मुआवजा 1,18,20,000 पुनर्निर्धारित किया गया जो अधिकरण द्वारा दिए गए मुआवजे से 59,98,000 अधिक है। बीमा कंपनी को 9 प्रतिशत ब्याज के साथ दो माह में राशि अदा करनी होगी।
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