छिंदवाड़ा के नदी मोहल्ला सिंगोड़ी में शुक्रवार सुबह एक मासूम की चीख ने पूरे इलाके को दहला दिया। घर के आंगन में खेल रहे 3 वर्षीय वेदांत वरोड़े पर अचानक एक आवारा कुत्ते ने हमला कर दिया। कुत्ते ने इतनी तेजी से झपटा कि आसपास मौजूद लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही बच्चे के चेहरे पर कई जगह गहरे घाव हो गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुत्ते ने पहले बच्चे को गिराया और फिर उसके चेहरे को निशाना बनाया। वेदांत दर्द से चिल्लाता रहा, लेकिन उसकी आवाज सुनकर उसकी दादी मुन्नी बाई बिना किसी डर के कुत्ते की ओर दौड़ीं। उन्होंने अपने हाथों से कुत्ते को पकड़कर पीछे खींचा और बच्चे को उसकी पकड़ से छुड़ाया। दादी की इस बहादुरी से बड़ी अनहोनी टली, लेकिन तब तक बच्चा गंभीर रूप से घायल हो चुका था।
खून से लथपथ मासूम, मदद के लिए तरसता परिवार
घटना के तुरंत बाद वेदांत का चेहरा खून से लथपथ था। मोहल्ले की महिलाएं उसे गोद में लेकर रोती रहीं। परिजन तत्काल उसे नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले गए, लेकिन वहां कोई डॉक्टर या नर्स मौजूद नहीं थी। इससे लोगों में और गुस्सा फैल गया। मजबूरी में बच्चे को बाइक से करीब 16 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल ले जाया गया।
रास्ते भर परिवार के लोग दुआ करते रहे कि कहीं बच्चे की हालत और खराब न हो। जिला अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने उसका उपचार शुरू किया और एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाया। डॉक्टरों ने बताया कि चेहरे पर गहरे घाव होने के कारण टांके भी लगाने पड़े हैं।
मोहल्ले में दहशत, बच्चे बाहर खेलने से डर रहे
इस घटना के बाद नदी मोहल्ला सिंगोड़ी में दहशत का माहौल है। माता-पिता अपने बच्चों को घर से बाहर खेलने नहीं भेज रहे हैं। मोहल्लेवासियों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में आवारा कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ी है। कई बार छोटे बच्चों और बुजुर्गों पर कुत्ते झपट चुके हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
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जिम्मेदार कौन?
स्थानीय लोगों का सवाल है कि नगर निगम और पशुपालन विभाग की जिम्मेदारी क्या है। अगर समय रहते आवारा कुत्तों पर नियंत्रण किया जाता, तो शायद आज वेदांत को इस दर्दनाक हादसे से नहीं गुजरना पड़ता।
प्रशासन से सख्त कदम की मांग
मोहल्लेवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि तुरंत इलाके में आवारा कुत्तों को पकड़ने का अभियान चलाया जाए, नसबंदी और टीकाकरण की व्यवस्था की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी योजना बनाई जाए।
वेदांत के चेहरे पर पड़े जख्म सिर्फ एक बच्चे का दर्द नहीं हैं, बल्कि यह स्वास्थ्य और सुरक्षा व्यवस्था की लापरवाही पर लगा एक बड़ा सवाल भी हैं। आज वेदांत अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा है और पूरा मोहल्ला उसकी सलामती की दुआ कर रहा है।
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