किसान ने बताई कोसा उत्पादन की पूरी प्रक्रिया
किसान राम प्यारे ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि वे मैनपाट महोत्सव में कार्निवल मेले के अंतर्गत तसर और मलवारी कोसा रेशम के उत्पादों का स्टॉल लगाए हुए हैं. उन्होंने बताया कि सबसे पहले तसर और मलवारी कोसा से धागा निकाला जाता है और फिर उसी धागे से कपड़ा बुना जाता है. यह पूरी प्रक्रिया पारंपरिक और हाथ से की जाती है.
तसर और मलवारी कोसा में क्या है अंतर
राम प्यारे ने समझाया कि तसर कोसा का धागा अपेक्षाकृत मोटा होता है, जबकि मलवारी कोसा का धागा पतला, मुलायम और ज्यादा चमकदार होता है. स्टॉल पर तसर और मलवारी दोनों प्रकार के कोसा काकून और उनसे बने धागे भी प्रदर्शित किए गए हैं, ताकि लोग इस पारंपरिक कला को करीब से समझ सकें.
दरिमा फील्ड से शुरू होती है कोसा की यात्रा
किसान ने बताया कि कोसा का कच्चा माल दरिमा फील्ड से आता है, जहां बड़े पैमाने पर कोसा उत्पादन किया जाता है. खेतों से कोसा (काकून) एकत्र करने के बाद उसे प्रोसेसिंग के लिए केंद्रों पर भेजा जाता है. इन केंद्रों का कार्यालय अंबिकापुर में स्थित है, जहां से तैयार सामग्री को मैनपाट महोत्सव में लाया जाता है.
किसान सिर्फ काकून उगाते हैं, आगे व्यापारी करते हैं प्रोसेसिंग
किसान राम प्यारे ने बताया कि किसान केवल काकून का उत्पादन करते हैं. इसके बाद व्यापारी काकून खरीदकर उससे धागा निकालते हैं और फिर कपड़ा तैयार किया जाता है. स्टॉल पर कोसा से बने कई उत्पाद रखे गए हैं, जिनमें साड़ियां, शर्ट का कपड़ा, कोट और अन्य पारंपरिक वस्त्र शामिल हैं.
25 एकड़ में होती है खेती, खेती बेहतर तो 3 लाख तक की आमदनी
राम प्यारे ने बताया कि वे दरिमा क्षेत्र में करीब 25 एकड़ भूमि पर कोसा उत्पादन करते हैं. अच्छी खेती होने में इससे 2 से 3 लाख रुपये तक की आमदनी हो जाती है. हालांकि, इस साल बीमारी के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिससे किसानों को नुकसान झेलना पड़ा. किसान ने जानकारी दी कि 13-14 तारीख के आसपास मलवारी कोसा के अंडे आने वाले हैं, जिसके बाद नई फसल की शुरुआत होगी. इससे किसानों को उम्मीद है कि आने वाले समय में उत्पादन फिर से बेहतर होगा.
हाथ से बनी कोसा साड़ियां भी प्रदर्शित
वहीं स्टॉल पर मौजूद एक अन्य किसान ने बताया कि तसर काकून से बनी साड़ी और मलवारी काकून से बनी साड़ी भी प्रदर्शित की गई हैं. ये सभी उत्पाद अंबिकापुर से लाकर मैनपाट महोत्सव में लगाए गए हैं.
पूरी तरह हस्तनिर्मित है कोसा उत्पादन की प्रक्रिया
किसानों ने बताया कि कोसा उत्पादन की पूरी प्रक्रिया हाथ से की जाती है. सबसे पहले कीड़ों से काकून बनता है, फिर उससे धागा और बाद में कपड़ा तैयार किया जाता है. काकून के लिए अंडे बाहर से लाए जाते हैं, जिसके बाद खेतों में पालन किया जाता है.
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