दरभंगा जिले के सिंहवाड़ा प्रखंड के नगर पंचायत भरवाड़ा से शनिवार देर रात नरक निवारण चतुर्दशी के अवसर पर झारखंड के देवघर स्थित बैद्यनाथ धाम के लिए 251 कांवर यात्रियों का जत्था रवाना हुआ। ये सभी कांवर यात्री भरवाड़ा से सुल्तानगंज पहुंचेंगे, जहां पवित्र गंगाजल अपने कांवर में भरेंगे। इसके बाद वे 108 किलोमीटर की पैदल यात्रा छह दिनों में पूरी कर बैद्यनाथ धाम में जलाभिषेक करेंगे। देवघर से लगभग 48 किलोमीटर दूर बासुकीनाथ धाम जाकर वहां भी महादेव को जलाभिषेक किया जाएगा। बासुकीनाथ से वापसी के बाद, वसंत पंचमी के दिन देवघर में भैरव पूजा की जाएगी। ऐसी मान्यता है कि देवघर आने के बाद बासुकीनाथ में जलाभिषेक करने से ही पूजा संपूर्ण होती है, जिसके बाद भैरव पूजा करने से पाप नष्ट होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है। इस कांवर यात्रा में विभिन्न समितियों के सदस्य शामिल हैं। नवयुवक कांवरिया समिति सेवा समिति, भरवाड़ा के डण्डी बाबा विनोद साह और खजांची देवेन्द्र ठाकुर ने बताया कि बाबा के धाम जाने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। नवयुवक सेवा संघ, भरवाड़ा के जमेदार बम शत्रुधन साह और खजांची शंभु साह (गुड्डू) के अनुसार, पूजा-अर्चना से हर पाप नष्ट होते हैं और देश पर आने वाले संकट दूर होते हैं। शिव सेवा समिति, भरवाड़ा के खजांची अरुण कुमार यादव ने बताया कि नए भक्तों के लिए विशेष ध्यान रखा जाएगा। द्वादश ज्योतिर्लिंग दर्शन संघ, भरवाड़ा के अन्तोदय नारायण सिन्हा, मनोज साह, हरिओम साह, अशोक यादव और विजय यादव ने जानकारी दी कि यह यात्रा सात दिनों की है और माघ मास में बाबा को जल चढ़ाने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। कांवर यात्रियों का यह प्रस्थान नरक निवारण चतुर्दशी के दिन हुआ। यह हिंदू त्योहार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है, जिसमें भगवान शिव और यमराज की पूजा कर नरक से मुक्ति की कामना की जाती है। वसंत पंचमी, जिस दिन भैरव पूजा की जाएगी, माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाई जाती है। यह दिन वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है और इसमें भगवान शिव और पार्वती की पूजा का भी महत्व है।
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.