अपने संबोधन में स्मृति ईरानी ने यह भी बताया कि अलग-अलग सेक्टरों, ट्रेड एसोसिएशनों और मार्केट संगठनों को एक साझा मंच पर लाकर साथ काम करवाना उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है। इस पहल में गेट्स फाउंडेशन का सहयोग मिल रहा है और टाटा ट्रस्ट के साथ भी सकारात्मक बातचीत चल रही है। इसके अलावा, डेलॉयट इस पूरे प्रयास में नॉलेज पार्टनर के रूप में जुड़ा हुआ है, जिससे नीतिगत और व्यावहारिक स्तर पर स्टार्टअप्स को मार्गदर्शन मिल रहा है।
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स्मृति ईरानी ने कहा कि यदि भारत को वैश्विक मंच पर अग्रणी बनाना है तो केवल “सबका साथ, सबका विकास” का नारा पर्याप्त नहीं है, बल्कि “सबका प्रयास” भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जब समाज, नीति-निर्माता, उद्योग और स्टार्टअप इकोसिस्टम मिलकर काम करते हैं, तभी टिकाऊ विकास और वास्तविक सामाजिक परिवर्तन संभव हो पाता है। उन्होंने युवा उद्यमियों से अपील की कि वे सिर्फ मुनाफे पर ध्यान न दें, बल्कि सामाजिक प्रभाव पर भी फोकस करें। उनके अनुसार, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के जरिए स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका जैसे क्षेत्रों में बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं, और यही भारत के भविष्य की असली ताकत है।
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