घटना की शुरुआत महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य चरणदास बर्मन और प्रोफेसर ऋषि कुमार चंद्रा व लक्ष्मी प्रसाद के बीच किसी बात को लेकर हुई तीखी बहस से हुई। देखते ही देखते यह विवाद इतना बढ़ गया कि नौबत लात-घूंसे और हाथापाई तक पहुंच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कॉलेज परिसर कुछ देर के लिए अखाड़े में तब्दील हो गया था, जिससे वहां मौजूद छात्रों को भी आश्चर्य और भय का सामना करना पड़ा।
पुरानी गुटबाजी बनी घटना की वजह
कॉलेज से जुड़े सूत्रों की मानें तो यह घटना अचानक नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी और आपसी खींचतान है। प्रशासनिक निर्णयों, दायित्वों के बंटवारे और प्रभारी प्राचार्य के पद को लेकर शिक्षकों के बीच पहले से ही मतभेद चल रहे थे, जो अब मारपीट के रूप में फूट पड़े। यह स्थिति शिक्षकों के बीच सामंजस्य की कमी को उजागर करती है।
पुलिस जांच में जुटी, विभागीय कार्रवाई की संभावना
घटना के बाद प्रभारी प्राचार्य सहित दोनों प्रोफेसरों ने स्थानीय थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है और सभी संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल कॉलेज परिसर में तनाव का माहौल बना हुआ है। शिक्षा विभाग स्तर पर भी इस मामले को लेकर विभागीय जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है, जो ऐसे कृत्यों के प्रति गंभीरता को दर्शाती है।
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