डॉ. पूजा तिवारी ने अपने शोध में यह भी रेखांकित किया कि जब जानकारी और संचार वैश्विक हो रहा है तो हिन्दी भाषा के लिए यह अवसरों का स्वर्णकाल है. उन्होंने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म, मशीन लर्निंग और डेटा आधारित अनुवाद से हिन्दी के प्रसार और विश्व-पटल पर स्वीकार्यता में नई संभावनाएं पैदा हुई हैं.
प्राध्यापिका पूजा तिवारी ने कहा कि उनके अनुसार हिन्दी के भविष्य में मशीन और मानवीय संवेदना दोनों की साझी भूमिका तय है और इस दिशा में शोध सतत प्रयासों से आगे बढ़ेगा. यह संगोष्ठी 9 से 12 जनवरी तक मॉरीशस में आयोजित हुई, जिसका केंद्रीय विषय था ‘हिन्दी भाषा में नवाचार.’ कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन विश्व हिन्दी सचिवालय, मॉरीशस, साहित्य संचय फाउंडेशन, दिल्ली, हिन्दी प्रचारिणी सभा, मॉरीशस और महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के हिन्दी और अन्य भारतीय भाषा विभाग द्वारा किया गया. चार दिनों तक चले इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत समेत कई देशों से जुड़े विद्वानों, शोधकर्ताओं और भाषा विशेषज्ञों ने भाग लिया.
डॉ. पूजा तिवारी ने अपने शोध में यह भी रेखांकित किया कि जब जानकारी और संचार वैश्विक हो रहा है तो हिन्दी भाषा के लिए यह अवसरों का स्वर्णकाल है. उन्होंने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म, मशीन लर्निंग और डेटा आधारित अनुवाद से हिन्दी के प्रसार और विश्व-पटल पर स्वीकार्यता में नई संभावनाएं पैदा हुई हैं. संगोष्ठी में हिन्दी भाषा, साहित्य, भाषाई तकनीक, नवाचार, वैश्विक संदर्भों और शिक्षा प्रणाली पर विभिन्न सत्रों के माध्यम से विमर्श हुआ. शोधपत्र प्रस्तुतियों, विचार-संवाद और सांस्कृतिक भाषाई आदान-प्रदान ने इस आयोजन को विशेष बनाया.
स्थानीय स्तर पर डॉ. तिवारी की उपलब्धि का स्वागत करते हुए विद्या भवन महिला कॉलेज के शिक्षकों और छात्राओं ने प्रसन्नता व्यक्त की. कॉलेज प्रशासन ने कहा कि यह उपलब्धि न सिर्फ शैक्षणिक प्रगति को दर्शाती है, बल्कि सीवान जैसे उभरते जिले की क्षमता और प्रतिभा का भी प्रमाण है.
डॉ. तिवारी ने लोकल 18 संवाददाता से बातचीत के दौरान कहा कि ऐसे मंच युवा शोधकर्ताओं और शिक्षकों को नए विचारों, दृष्टिकोणों और अनुसंधान की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं. उन्होंने कहा “अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विचार साझा करना मेरे लिए सौभाग्य की बात है. यह अनुभव हिन्दी भाषा के भविष्य पर विश्वास को और मजबूत करता है.” विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर विदेशों से जुड़े इस मंच पर सीवान की उपस्थिति ने जिले की शैक्षणिक पहचान को और सशक्त किया है. भविष्य में भी ऐसी उपलब्धियां जिले के छात्रों और शिक्षकों को प्रेरित करती रहेंगी, यही उम्मीद की जा रही है.
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