Sitamarhi News: सीतामढ़ी में गीतकार गीतेश ने नोमोफोबिया से बच्चों को बचाने के लिए स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाया है. जिससे 2500 से अधिक बच्चे लाभान्वित हुए और समाज में सकारात्मक बदलाव आया. उनका कहना है ऐसा काम करो कि गूगल तुमको खोजे, मोबाइल से दूर रहो, तुम गूगल को मत खोजो.
गूगल तुमको खोजे ऐसा इंसान बनो
गीतकार गीतेश बच्चों से सीधे जुड़ने का बहुत अनोखा तरीका अपनाते हैं. वे कविता, गीत और मनोरंजक संवाद के माध्यम से बच्चों के दिल तक पहुंचते हैं. उनकी एक पंक्ति बच्चों के बीच खासा लोकप्रिय हो रही है बच्चे फूल होते हैं, खेलने के लिए धूप-हवा-पानी चाहिए…मोबाइल के मौसम से झुलस न जाएं, थोड़ी सी निगरानी चाहिए. वे बच्चों को प्रेरित करते हैं कि मोबाइल का उपयोग जरूरत के अनुसार करें, उसे जीवन का मालिक नहीं, सहायक बनाएं. उनका कहना है कि “मोबाइल दूर रखो, गूगल को तुम मत खोजो, ऐसा इंसान बनो कि गूगल तुम्हें खोजने लगे. खास बात यह है कि खुद गीतेश साधारण छोटा मोबाइल रखते हैं, ताकि वे बच्चों को अपने व्यवहार से भी उदाहरण दे सकें.
बच्चों में ‘नोमोफोबिया’ तेजी से बढ़ रहा
गीतेश बताते हैं कि आजकल बच्चों में ‘नोमोफोबिया’ तेजी से बढ़ रहा है. नोमोफोबिया का मतलब है मोबाइल फोन के बिना घबराहट, बेचैनी और असुरक्षा महसूस करना. डॉक्टर इसे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्या मान रहे हैं. बच्चे जब मोबाइल से दूर होते हैं तो असहज महसूस करते हैं, यह स्थिति भविष्य के लिए खतरनाक संकेत है. लेकिन गीतेश कहते हैं कि साहित्य, संवेदना और सकारात्मक संवाद इस ‘बीमारी’ का सबसे असरदार इलाज है. वे अब तक जिले के विभिन्न स्कूलों और कोचिंग संस्थानों में जाकर 2500 से अधिक बच्चों को जागरूक कर चुके हैं. खास बात यह है कि करीब 1000 से अधिक बच्चे उनके सुझावों पर अमल भी करने लगे हैं. वे समय-समय पर उन्हीं संस्थानों में दोबारा जाकर इसका फॉलोअप भी करते हैं.
स्कूल संचालक सत्येंद्र सिंह ने भी इस अभियान की सराहना करते हुए कहा कि गीतकार गीतेश बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं. वे न केवल मोबाइल के दुष्प्रभाव बताते हैं बल्कि बच्चों के भीतर आत्मअनुशासन और आत्मविश्वास भी पैदा करते हैं. आज जब मोबाइल बच्चों के हाथ का खिलौना नहीं, बल्कि आदत बन चुका है, ऐसे में यह मुहिम समाज के लिए बेहद जरूरी और उपयोगी साबित हो रही है. नोमोफोबिया जैसे आधुनिक खतरे से बच्चों को बचाने का यह प्रयास न सिर्फ सीतामढ़ी बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन रहा है.
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मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें
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