Bihar Dismissed Fake Teachers Exam duty : बिहार के सीतामढ़ी जिले में बर्खास्त फर्जी शिक्षकों का मामला फिर उजागर हुआ है. जहां बर्खास्त शिक्षक राम पुकार राय और पूनम कुमारी की बिहार बोर्ड की 12वीं परीक्षा में ड्यूटी लगाई गई है, जिससे शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है.
7 फर्जी शिक्षक हुए थे बर्खास्त
बता दें कि निगरानी अन्वेषण ब्यूरो मुजफ्फरपुर की जांच में बथनाहा प्रखंड के 7 शिक्षकों के शैक्षणिक और प्रशैक्षणिक प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए थे. इसके बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी और स्थापना शाखा के पत्रांकों की जांच में 24 अगस्त 2024 को नियोजन इकाई की बैठक में इन सभी को तत्काल प्रभाव से सेवामुक्त कर दिया गया था. इनमें शिक्षक राम पुकार राय और शिक्षिका पूनम कुमारी भी शामिल थीं, जिनकी नियुक्ति क्रमशः 2007 और 2010 में हुई थी. वहीं, सेवामुक्ति बाद इन पर थाने में प्राथमिकी रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी.
जानें कैसे हुआ खुलासा
सबसे हैरानी की बात यह है कि जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कार्यालय को इन शिक्षकों की बर्खास्तगी की जानकारी होने के बावजूद परीक्षा ड्यूटी की डेटाबेस सूची में इनके नाम कैसे रह गए. वहीं, राम पुकार राय की तैनाती सीतामढ़ी उच्च माध्यमिक विद्यालय डुमरा में और पूनम कुमारी की ड्यूटी रघुनाथ झा कॉलेज में लगाई गई है. जहां 2 फरवरी से शुरू हुई परीक्षा में इन्होंने बतौर शिक्षक कार्य भी किया. यह प्रशासनिक गलती तब उजागर हुई जब परीक्षा समाप्ति के बाद ये शिक्षक विरमण पत्र (Relieving Letter) लेकर अपने विद्यालय पहुंचे और आगामी मैट्रिक परीक्षा में भी अपनी ड्यूटी होने का दावा किया.
परीक्षा ड्यूटी में तैनाथ थे दोनों शिक्षक-शिक्षिका
इस बारे में विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने स्पष्ट किया है कि इन शिक्षकों को अक्टूबर 2024 में ही पदमुक्त कर दिया गया था और तत्कालीन डीपीओ के निर्देशानुसार उनकी उपस्थिति दर्ज करने पर भी रोक थी. इसके बावजूद शिक्षा विभाग ने उन्हें ‘सक्रिय शिक्षक’ मानकर संवेदनशील परीक्षा कार्यों में लगा दिया. वहीं, सूत्रों का कहना है कि शिक्षकों ने जिला मुख्यालय से प्राप्त आधिकारिक आदेश का हवाला देकर ड्यूटी ज्वाइन की, जिससे यह है कि सूची को अपडेट करने में जानबूझकर ढिलाई बरती गई है.
बिहार में फर्जी शिक्षकों की हो रही है छंटनी
वहीं, शिक्षा विभाग पहले से ही फर्जी शिक्षकों की छंटनी और अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर चर्चा में है. ऐसे में इस तरह की लापरवाही विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करती है. सवाल यह है कि यदि बर्खास्त शिक्षक परीक्षा केंद्रों पर तैनात रहे तो परीक्षा की गोपनीयता और निष्पक्षता कैसे सुरक्षित रही? अब स्थानीय स्तर पर जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर मुड़ा है कि वे इस डेटा प्रबंधन की चूक के लिए जिम्मेदार कर्मियों और अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करते हैं.
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बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में लगभग 4 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटेंट राइटर…और पढ़ें
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