Success Story : सीकर के हिरणा गांव के युवा कलाकार मनीष ढाका ने संघर्षों के बीच अपनी कला से अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है. हूबहू स्केचिंग और चित्रकारी में माहिर मनीष को पीएम, सीएम और राज्यपाल तक से सराहना मिल चुकी है. 50 से अधिक पुरस्कार, ओएमजी बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम और दुबई का अनुभव उनकी मेहनत की कहानी बयां करता है.
Success Story: कौन कहता है आसमान में सुराग नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो… इस कहावत को सीकर के मनीष ढाका ने चरितार्थ कर दिखाया है. उन्होंने अपनी अनोखी कला के चकते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है. मनीष ने हूबहू चित्र और स्केचिंग में इतनी महारत हासिल कर ली है कि देश के प्रधानमंत्री, राज्य के मुख्यमंत्री और राज्यपाल तक में इनकी प्रशंसा की है. मनीष फतेहपुर उपखंड के हिरणा गांव के रहने वाले हैं.

बचपन से मनीष ढाका को पेंटिंग का बहुत शोख था. इसके बाद इसकी शोख इन्होंने अपना करियर बना लिए. हूबहू चित्र और स्केचिंग में महारत रखने वाले मनीष अब तक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी कला का लोहा मनवा चुके है. मनीष को पेंटिंग के क्षेत्र में अब तक 50 से अधिक पुरस्कार मिल चुके हैं. उनका नाम ओएमजी बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी दर्ज है. वे राष्ट्रीय गौरव सम्मान से सम्मानित हो चुके हैं. इसके अलावा इंडियन आर्ट गैलरी सहित कई प्रतिष्ठित आर्ट गैलरियों में उनके चित्रों की प्रदर्शनी लग चुकी है.

मनीष ने अवि शर्मा द्वारा रचित बालमुखी रामायण के लिए रामायण के विभिन्न प्रसंगों के चित्र तैयार किए. खास बात यह रही कि ये सभी बनाए गए थे. इस अनूठी कला शैली चित्र केवल काले बॉल प्वाइंट पेन से से प्रभावित होकर मनीष को पीएमओ और सीएमओ से प्रशंसा पत्र प्राप्त हुआ. वहीं राजस्थान के राज्यपाल मुलाकात कर उनकी कला को सराहा और गहरी रुचि दिखाई.
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विपरीत हालातों में भी नहीं मानी हार 24 वर्षीय मनीष का जीवन संघर्षों से भरा रहा है. वे चार भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं. मात्र 10 वर्ष की उम्र में उनकी माता का देहांत हो गया, लेकिन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई और कला दोनों को नहीं छोड़ा. नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण कर उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई वहीं से की. इसके बाद बीकानेर से बीएफए की प्रोफेशनल डिग्री हासिल की.

मनीष ने बताया कि उन्होंने डेढ़ वर्ष तक दुबई की वुडलैम संस्था में रहकर पेंटिंग सिखाई है. इसके बाद वे अब वापस भारत लौट चुके हैं. इस अंतरराष्ट्रीय अनुभव ने उनकी कला शैली को नई सोच और व्यापक दृष्टि प्रदान की है. वैश्विक स्तर पर कार्य करने से उनका आत्मविश्वास भी काफी बढ़ा है. इस दौरान दुबई स्थित मणिपाल विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें सम्मानित किया जाना उनकी उपलब्धियों का प्रमाण है.

मनीष का अगला लक्ष्य गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराना है. पहले उनका झुकाव मॉडर्न आर्ट की ओर था, लेकिन अब वे स्केचिंग पर अधिक फोकस कर रहे हैं. वर्तमान में वे दिन में स्कूल में मैनेजमेंट का कार्य संभालते है और शेष समय पेंटिंग को देते हैं. कला के साथ सामाजिक सरोकार भी मनीष सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय हैं. इसके अलावा शॉर्ट फिल्मों के माध्यम से भी मनीष सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार कर रहे हैं. उनकी फिल्में आटा साटा: एक कुप्रथा और मौत के बाद किसान को समाज में सकारात्मक संदेश दिए.
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