Injured Stray Animal Rescue: एक घायल और निराश्रित पशु को तड़पते हुए देखने के बाद लिया गया एक छोटा सा संकल्प आज इंसानियत की बड़ी मिसाल बन चुका है. सेवा भाव से प्रेरित इस व्यक्ति ने बीते साढ़े पांच वर्षों में करीब 1500 से अधिक घायल, बीमार और बेसहारा पशुओं को नया जीवन दिया है. सड़क पर घायल पशुओं का उपचार, समय पर दवा, भोजन और सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराना ही इनका मुख्य उद्देश्य रहा है. बिना किसी सरकारी सहायता के, समाज के सहयोग से यह सेवा अभियान लगातार आगे बढ़ रहा है.
सीकर. राजस्थान के झुंझुनू के सौंथली गांव में एक युवा अरविंद अग्रवाल घायल पशुओं को सहारा बन रहा है. इन्होंने साढ़े पांच साल पहले अपना कर्म फाउंडेशन बनाया था. शुरू में कोई नहीं जुड़ा तो खुद मेडिकल किट लेकर घायल पशुओं का इलाज करने पहुंच जाते. लेकिन, आज उनके साथ सैकड़ों लोग जुड़ चुके हैं. अरविंद ने बताया कि अब तक उनकी टीम 1500 से अधिक निराश्रित और घायल पशुओं का इलाज कर चुकी है.

उन्होंने बताया कि उनकी टीम सड़क दुर्घटनाओं में घायल गोवंश और अन्य जीवों इलाज करती है. संस्था की टीम हर सूचना पर तुरंत मौके पर पहुंचकर प्राथमिक उपचार देती है और जरूरत पड़ने पर पशुओं को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर दवा, इंजेक्शन और मरहम पट्टी करती है. खास बात ये है कि अरविंद के इस फाउंडेशन की सेवाएं पूरी तरह निशुल्क हैं. पशुओं के इलाज पर हर महीने करीब 50 हजार रुपये से अधिक खर्च हो रहा है.

घायल पशुओं के इलाज के अलावा अपना कर्म फाउंडेशन द्वारा टीटनवाड़-जाखल मार्ग स्थित एक निजी भूखंड पर अपना कर्म गौ चिकित्सालय भी संचालित किया जा रहा है, जहां घायल और बीमार पशुओं का इलाज किया जाता है. अरविंद अग्रवाल खुद इस फाउंडेशन के अध्यक्ष है. उन्होंने बताया कि हाइवे पर वाहन की टक्कर से घायल पशु को तड़पते देखकर उनका मन विचलित हो गया था. इसी घटना से प्रेरित होकर उन्होंने अपने दोस्तों के साथ मिलकर निराश्रित पशुओं की सेवा करने का संकल्प लिया.
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<br />15 अगस्त 2020 को उन्होंने अपना कर्म नाम से एक ग्रुप बनाकर सेवा कार्य शुरू किया गया, जो धीरे-धीरे एक संगठित फाउंडेशन के रूप में विकसित हो गया. आज इस फाउंडेशन से करीब 970 लोग जुड़े हुए हैं, जो पशु सेवा में सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं. आसपास के 15 से 20 गांवों के गौ सेवक भी संस्था के कार्यों में सहयोग कर रहे हैं. सामूहिक प्रयासों से फाउंडेशन ने सैकड़ों घायल और बेसहारा पशुओं को नया जीवन देने का काम किया है, जिससे क्षेत्र में पशु कल्याण के प्रति जागरूकता भी बढ़ी है।.

अरविंद अग्रवाल ने बताया कि गौ चिकित्सालय के स्थायी संचालन के लिए सरकारी भूखंड की आवश्यकता है, जिसके लिए वे लंबे समय से प्रयासरत हैं. उनका मानना है कि सरकारी भूखंड मिलने से पशुओं के उपचार की सुविधाएं और अधिक बेहतर हो सकेंगी तथा बड़े स्तर पर सेवा कार्य किया जा सकेगा. उन्होंने प्रशासन से इस दिशा में सहयोग की अपील भी की है.

अरविंद अग्रवाल ने बताया कि इस सेवा मिशन की शुरुआत महज 700 रुपये की पॉकेट मनी से की गई थी. सीमित संसाधनों के बावजूद दृढ़ संकल्प और समाज के सहयोग से यह अभियान आज एक बड़े सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुका है. भामाशाहों और ग्रामीणों के सहयोग से अपना कर्म फाउंडेशन ने पशु सेवा के क्षेत्र में प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है और भविष्य में भी इस सेवा को विस्तार देने का लक्ष्य रखा है.
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