श्रीकृष्ण मंदिर परिसर में अमर सिंह सराठे परिवार द्वारा आयोजित सप्त दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का समापन हवन, पूजन और भंडारे के साथ हुआ। कथा व्यास संतोष शास्त्री ने श्रीकृष्ण से जुड़ी माणिक चोरी, विवाह प्रसंग और सुदामा चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा, सच्ची मित्रता वही होती है जैसी श्रीकृष्ण और सुदामा के बीच थी।
सुदामा ने कुछ नहीं मांगा, फिर भी श्रीकृष्ण ने सब कुछ दे दिया। शास्त्री ने श्रोताओं से इस मित्रता से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। कथा के दौरान मधुर भजनों और संगीत पर श्रद्धालु भक्ति में झूमते रहे। पूरे क्षेत्र में धार्मिक वातावरण बना रहा। समापन अवसर पर कायस्थ समाज और सेन समाज के लोगों ने संतोष शास्त्री को शाल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया। नगर क्षेत्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा में शामिल हुए।
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