जांच रिपोर्ट में क्या निकला?
मरीज के साथ मारपीट की घटना के बाद सरकार ने एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की थी. समिति ने 2 जनवरी को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपी. जांच में पाया गया कि 22 दिसंबर को हुई वह घटना ‘दोनों पक्षों की गैर-जिम्मेदाराना प्रतिक्रिया’ का परिणाम थी. रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख किया गया कि डॉ. राघव का पिछला रिकॉर्ड बेदाग रहा है और उनके खिलाफ पहले कोई शिकायत नहीं थी.
माफी और कड़ी चेतावनी के साथ बहाली
डॉ. राघव निरूला ने जांच समिति के समक्ष अपने किए पर गहरा खेद प्रकट किया और बिना शर्त माफी मांगी. सरकार ने उनकी बहाली के साथ सख्त निर्देश जारी किए हैं कि भविष्य में उन्हें पेशेवर आचरण, अनुशासन और चिकित्सा नैतिकता के मानकों का पालन करना होगा. आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि यदि भविष्य में ऐसी कोई घटना दोबारा हुई, तो बिना किसी रियायत के सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
22 दिसंबर 2025… शिमला के कुपवी (जुब्बल) निवासी 36 वर्षीय मरीज अर्जुन सिंह पंवार IGMC के पल्मोनरी मेडिसिन वार्ड में उपचाराधीन थे. दोपहर करीब 12:30 बजे डॉक्टर और मरीज के बीच ‘तू-तड़ाक’ से बात शुरू हुई. मरीज का आरोप था कि डॉक्टर ने बदतमीजी की, जबकि डॉक्टर का कहना था कि मरीज और उसके परिजनों ने उकसाया. देखते ही देखते विवाद मारपीट में बदल गया. बेड पर लेटे मरीज को डॉक्टर ने थप्पड़ जड़े, तो जवाब में मरीज ने भी लात चलाई.
वीडियो वायरल और सस्पेंशन
वहां मौजूद तीमारदारों ने इस पूरी घटना का वीडियो बना लिया, जो सोशल मीडिया पर देशव्यापी स्तर पर वायरल हो गया. चौतरफा दबाव के बीच सुक्खू सरकार ने उसी दिन डॉ. राघव को निलंबित कर दिया और प्रारंभिक जांच के आधार पर उनकी सेवाएं समाप्त (Terminated) कर दी थीं.
डॉक्टरों की हड़ताल और समझौता
डॉक्टर की बर्खास्तगी के विरोध में प्रदेशभर के रेजिडेंट डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे. स्वास्थ्य सेवाएं चरमराने लगीं. हालांकि, मुख्यमंत्री की सख्ती के बाद डॉक्टर काम पर लौटे. इस बीच, पर्दे के पीछे मरीज और डॉक्टर के बीच सुलह की प्रक्रिया चली. अंततः मरीज ने अपनी शिकायत वापस ले ली और दोनों पक्षों में समझौता हो गया.
क्या है बहाली का मुख्य आधार?
- मरीज अर्जुन द्वारा शिकायत वापस लेना.
- समिति द्वारा घटना को ‘अचानक उपजा विवाद’ मानना.
- डॉक्टर द्वारा लिखित में अपनी गलती स्वीकार करना.
बता दें कि डॉ. राघव निरूला अनुबंध (Contract) पर तैनात थे. हालांकि सरकार ने बर्खास्तगी रद्द कर दी है, लेकिन उन्हें भविष्य के लिए ‘लास्ट वार्निंग’ दी गई है. वहीं, डॉ. राघव निरुला की बर्खास्तगी के आदेश को वापस लेकर सेवा बहाली के फैसले का रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन आईजीएमसी ने स्वागत किया है. इसके लिए आरडीए अध्यक्ष डॉ. सोहिल शर्मा और अन्य पदाधिकारियों ने सीएम सुक्खू और स्वास्थ्य मंत्री कर्नल डॉ. धनीराम शांडिल का आभार व्यक्त किया है.
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