Honey bee farming : बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में खेती के साथ मधुमक्खी पालन किसानों के लिए अतिरिक्त आय का सशक्त माध्यम बनता जा रहा है. कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक मार्गदर्शन और जिले की अनुकूल जलवायु से कम लागत में शहद उत्पादन संभव हो रहा है. ग्राम मंगरहारा के किसान उदय राम की सफलता अन्य ग्रामीणों को प्रेरित कर रही है.
ग्राम मंगरहारा में स्थापित मधुमक्खी बक्सों के माध्यम से किसान उदय राम खेती के साथ मधुमक्खी पालन कर रहे हैं. कम लागत में शुरू हुआ यह व्यवसाय आज उनके लिए स्थायी आय का स्रोत बन गया है. कृषि विज्ञान केंद्र के सहयोग से अपनाई गई वैज्ञानिक पद्धति ने उत्पादन और गुणवत्ता दोनों को बेहतर किया है.

प्रारंभ में मात्र दो मधुमक्खी बक्सों से शुरुआत करने वाले उदय राम आज 20 बक्सों का सफल संचालन कर रहे हैं. उनके इस प्रयास ने यह साबित किया है कि सही प्रशिक्षण और धैर्य के साथ मधुमक्खी पालन एक लाभकारी उद्यम बन सकता है.

मधुमक्खियों से प्राप्त गुणवत्तायुक्त शहद का उत्पादन उदय राम प्रतिवर्ष 400 से 500 किलोग्राम तक कर रहे हैं. बाजार में शुद्ध शहद की अच्छी मांग होने के कारण उन्हें 500 रुपये प्रति किलो तक का मूल्य मिल रहा है, जिससे उनकी सालाना आय 2 से 2.5 लाख रुपये तक पहुंच रही है.
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उदय राम की सफलता से प्रेरित होकर ग्राम मंगरहारा के 10 से अधिक परिवारों ने मधुमक्खी पालन को अपनाया है. यह व्यवसाय अब गांव स्तर पर रोजगार सृजन और आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन रहा है.

कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के अनुसार बलरामपुर – रामानुजगंज जिले की जलवायु मधुमक्खी पालन के लिए बेहद अनुकूल है. लघु, सीमांत और भूमिहीन किसान भी 5 से 10 बक्सों से इस व्यवसाय की शुरुआत कर सकते हैं. शासन द्वारा मधुमक्खी बक्सों और कॉलोनियों पर दी जा रही सब्सिडी ने इसे और अधिक सुलभ बना दिया है.
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