Himachal Economic Crisis: हिमाचल प्रदेश शिमला में वित्त आयोग ने हिमाचल प्रदेश का राजस्व घाटा अनुदान बंद किया, OPS की जगह UPS अपनाने की सिफारिश की, सब्सिडी और सामाजिक सुरक्षा पेंशन पर कटौती की संभावना जताई. वित्त विभाग ने रविवार को इस संबंध में प्रेजेंटेशन दी और सरकार को कई सिफारिशें की.
वित्त विभाग के सचिव देवेश कुमार ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सभी प्रकार की सब्सिडी को बंद करना होगा.
वित्त विभाग के सचिव देवेश कुमार ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सभी प्रकार की सब्सिडी को बंद करना होगा. खाद्य सब्सिडी को भी खत्म करने की सिफारिश की गई और कहा कि बीपीएल परिवारों को पहले से ही केंद्र प्रायोजित योजनाओं (CSS) के तहत मुफ्त राशन मिल रहा है. इसके अलावा, बिजली सब्सिडी को भी खत्म करने का प्रस्ताव प्रेजेंटेशन में रखा गया. इससे लगभग 1200 करोड़ रुपये की बचत होगी.
आरडीजी ग्रांट बंद करने से हिमाचल पर खासा असर हुआ.
उधर, सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना की भी समीक्षा की बात सामने आई है. वर्तमान स्थिति में इस मद में 1661 करोड़ रुपये की जरूरत बताई गई है, जबकि प्रस्तावित प्रावधान करीब 500 करोड़ रुपये का रखने की बात कही गई है. इसके साथ ही लाभार्थियों की संख्या और पात्रता की दोबारा जांच का सुझाव दिया गया है. डीटीबी योजनाओं और पेंशनरों में फर्जी और डुप्लीकेट प्रविष्टियों को हटाने की भी तैयारी है. शिमला में मीडिया से बातचीत में मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि ओल्ड पेंशन योजना लंबे समय तक लागू नहीं की जा सकती है. हालांकि, जब इसे लागू किया गया था, जब यूपीएस विकल्प नहीं था.
समय समय पर सीएम कहते रहे हैं कि ओल्ड पेंशन योजना कभी बंद नहीं करेंगे.
भविष्य की भर्तियों के लिए UPS अपनाने की सिफारिश
वित्त आयोग ने कहा कि भविष्य की भर्तियों के लिए यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) अपनाने या नई पेंशन योजना (NPS) को दोबारा अपनाया जाएगा तो इससे अतिरिक्त उधारी के रूप में प्रतिवर्ष लगभग 1800 करोड़ रुपये जुटाए जा सकते हैं. अहम बात है कि सरकार की इंदिरा गांधी योजना का जिक्र तो सीधे तौर पर इसमें किया नहीं गया, लेकिन समाजिक सुरक्षा पेंशन के तहत ही यह योजना है और ऐसे में अब महिलाओं को 1500-1500 रुपये भी भविष्य में मिलना असंभव नजर आ रहा है. तीन साल में सुक्खू सरकार केवल 35 हजार महिलाओं को ही यह राशि एक किश्त में दे पाई है. जबकि वादा हर महिला को हर महीने पैसे देने का था.
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Vinod Kumar Katwal, a Season journalist with 14 years of experience across print and digital media. I have worked with some of India’s most respected news organizations, including Dainik Bhaskar, IANS, Punjab K…और पढ़ें
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