जैसलमेर जिले में लगातार बढ़ रही कड़ाके की ठंड और शीतलहर ने आम लोगों की दिनचर्या को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। खासकर सुबह और रात के समय तापमान में तेज गिरावट देखी जा रही है, जिससे छोटे बच्चों और बुजुर्गों के बीमार पड़ने का खतरा बढ़ गया है। इसी स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है।
जैसलमेर जिला कलेक्टर प्रताप सिंह के निर्देश पर जिले के सभी सरकारी, गैर-सरकारी, निजी स्कूलों, प्ले स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले नर्सरी से लेकर कक्षा 8वीं तक के विद्यार्थियों के लिए 8 जनवरी 2026 से 10 जनवरी 2026 तक अवकाश घोषित किया गया है। प्रशासन ने साफ किया है कि यह निर्णय पूरी तरह बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है।
शीतलहर से बच्चों को बचाने पर प्रशासन का जोर
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार मौजूदा मौसम में सुबह के समय घना कोहरा, ठंडी हवाएं और न्यूनतम तापमान में भारी गिरावट बच्चों के लिए स्वास्थ्य संबंधी परेशानी पैदा कर सकती है। विशेष रूप से नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी और प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चे ठंड से जल्दी प्रभावित होते हैं। इसी कारण बच्चों को शीतलहर से सुरक्षित रखने के लिए अवकाश का निर्णय लिया गया है।
कक्षा 9 से 12 के लिए बदला स्कूल समय
उच्च कक्षाओं की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यालय पूर्व जारी आदेश के अनुसार 12 जनवरी 2026 तक सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक संचालित होंगे। इससे विद्यार्थियों को सुबह की अत्यधिक ठंड से राहत मिलेगी।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्कूलों में कार्यरत सभी शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक कर्मचारी अपने निर्धारित विभागीय समय के अनुसार विद्यालय में उपस्थित रहेंगे, ताकि स्कूल की व्यवस्थाएं सुचारू रूप से चलती रहें।
बोर्ड परीक्षाओं में कोई बदलाव नहीं
बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए प्रशासन ने साफ किया है कि वर्ष 2026 की बोर्ड प्रायोगिक परीक्षाएं अपने तय कार्यक्रम और समय के अनुसार ही होंगी। इन परीक्षाओं में किसी प्रकार का बदलाव या स्थगन नहीं किया गया है। साथ ही परीक्षा केंद्रों पर विद्यार्थियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं।
आदेश न मानने पर सख्त कार्रवाई
जिला प्रशासन ने सभी सरकारी और निजी स्कूलों के प्रधानाचार्यों और संस्थाप्रधानों को आदेशों का पूरी तरह पालन करने के निर्देश दिए हैं। यदि कोई विद्यालय इन आदेशों की अनदेखी करता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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