बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली एक बार फिर उजागर हुई है। सारण जिले की अतिप्राचीन औद्योगिक नगरी के रूप में प्रसिद्ध अनुमंडल मुख्यालय मढ़ौरा में एक निजी नर्सिंग होम में जच्चा-बच्चा की मौत ने न केवल स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि सरकारी अस्पतालों और निजी नर्सिंग होम के बीच कथित गठजोड़ को भी बेनकाब कर दिया है। यह घटना कोई पहली नहीं है, बल्कि इससे पहले भी मढ़ौरा समेत आसपास के क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से जुड़ी कई घटनाएं सामने आती रही हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि मढ़ौरा स्थित आरपीसी नामक निजी नर्सिंग होम नियमों के विरुद्ध संचालित किया जा रहा था। बताया जा रहा है कि नर्सिंग होम के संचालक डॉ. आर.एन. तिवारी स्वयं क्लीनिक में नियमित रूप से मौजूद नहीं रहते थे और पूरा संचालन कर्मियों के भरोसे छोड़ा गया था। अप्रशिक्षित स्टाफ, आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं का अभाव और योग्य चिकित्सकों की अनुपस्थिति मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। वहीं दूसरी ओर सरकारी अस्पतालों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है, जहां संसाधनों की कमी, चिकित्सकों की अनुपलब्धता और मरीजों को निजी अस्पतालों में रेफर करने की प्रवृत्ति आम हो चुकी है।
जानकारी के अनुसार, सारण जिले के तरैया थाना क्षेत्र अंतर्गत भटौरा गांव निवासी संदीप शर्मा की 30 वर्षीय पत्नी तारामुन्नी देवी को प्रसव पीड़ा होने पर परिजनों ने मढ़ौरा स्थित रेफरल अस्पताल में भर्ती कराया था। परिजनों का आरोप है कि वहां मौजूद आशा कार्यकर्ता ने सरकारी अस्पताल के प्रभारी चिकित्सक से मिलीभगत कर महिला को बहला-फुसलाकर निजी नर्सिंग होम में भर्ती करा दिया।
इसके बाद महिला को मढ़ौरा मुख्यालय के स्टेशन माल गोदाम रोड स्थित आरपीसी निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया। परिजनों के अनुसार, वहां मौजूद कर्मियों ने शुरुआत में सब कुछ सामान्य बताया, लेकिन उस समय न तो कोई चिकित्सक मौजूद था और न ही आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। इलाज में गंभीर लापरवाही के चलते प्रसव से ठीक पहले नवजात शिशु की मौत हो गई। इसके बाद प्रसूता की हालत तेजी से बिगड़ने लगी, लेकिन इसके बावजूद समय पर समुचित इलाज नहीं किया गया।
मृतका के पति संदीप शर्मा ने आरोप लगाया कि बच्चे की मौत के बाद अस्पताल कर्मियों ने आनन-फानन में एंबुलेंस बुलाकर प्रसूता को उसमें शिफ्ट कर दिया। परिजनों को बताया गया कि महिला की हालत गंभीर है, इसलिए उसे छपरा सदर अस्पताल रेफर किया जा रहा है। हालांकि छपरा ले जाने के दौरान मिर्जापुर बाजार के समीप रास्ते में ही तारामुन्नी देवी की मौत हो गई।
इसके बाद परिजन शव को लेकर निजी नर्सिंग होम पहुंचे, लेकिन परिजनों के पहुंचने से पहले ही नर्सिंग होम के संचालक, चिकित्सक और अन्य कर्मी फरार हो चुके थे। परिजन घंटों तक शव के साथ अस्पताल परिसर में बैठे रहे और चिकित्सक के आने का इंतजार करते रहे, लेकिन कोई भी मौके पर नहीं पहुंचा। घटना की सूचना मिलते ही मृतका के गांव से बड़ी संख्या में परिजन और स्थानीय लोग निजी नर्सिंग होम के पास जुट गए और जमकर हंगामा किया। आक्रोशित लोगों ने नर्सिंग होम संचालक और संबंधित चिकित्सक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों से निजी क्लीनिकों की ओर मरीजों को मोड़ना अब एक गंभीर समस्या बन चुकी है। इसमें आशा कार्यकर्ताओं से लेकर कुछ चिकित्सकों की मिलीभगत की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रहती हैं, लेकिन इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। स्वास्थ्य विभाग की कमजोर निगरानी के कारण निजी नर्सिंग होम बेलगाम हो चुके हैं।
सूचना मिलने पर 112 पुलिस मौके पर जरूर पहुंची, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस ने न तो गहन पूछताछ की और न ही कोई ठोस कार्रवाई करते हुए कुछ ही देर में बैरंग लौट गई। लोगों का कहना है कि जब तक दोषी चिकित्सकों और अवैध रूप से संचालित निजी नर्सिंग होम व क्लीनिकों पर सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी, तब तक इस तरह की दर्दनाक घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं।
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